Wednesday, July 1, 2026 |
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भारतीय रुपया में 12 वर्षों की सबसे बड़ी तेजी, आरबीआई के कड़े कदमों का असर

by Business Remedies
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The exchange rate between the Indian Rupee and the Dollar is on the rise.

New Delhi,

भारतीय रुपया ने गुरुवार को 12 वर्षों में अपनी सबसे बड़ी एकदिवसीय बढ़त दर्ज की, जब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मुद्रा सट्टेबाजी पर लगाम कसने के लिए सख्त कदम उठाए। केंद्रीय बैंक द्वारा ऑफशोर डेरिवेटिव बाजारों पर भी नियंत्रण बढ़ाने के फैसले के बाद रुपया मजबूत हुआ। तीन दिन के अवकाश के बाद कारोबार शुरू होते ही रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1.7 प्रतिशत तक मजबूत होकर 93.25 पर पहुंच गया। यह बढ़त सितंबर 2013 के बाद की सबसे तेज उछाल मानी जा रही है। जहां एक ओर एशियाई मुद्राओं में कमजोरी देखी गई, वहीं भारतीय रुपया मजबूती के साथ आगे बढ़ा। इसका कारण आरबीआई द्वारा उठाए गए सख्त कदम रहे। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के संकेतों ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता पैदा की।

कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज वृद्धि दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड का भाव 5.24 प्रतिशत बढ़कर 106.47 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 4.5 प्रतिशत बढ़कर 104.64 डॉलर प्रति बैरल हो गया। इससे आयात लागत बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है। एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट का माहौल रहा, जहां प्रमुख सूचकांकों में 3 प्रतिशत तक की कमजोरी देखी गई। वहीं stock market update के अनुसार, भारत में भी शुरुआती कारोबार में दबाव देखने को मिला। Sensex और Nifty दोनों ही लगभग 2 प्रतिशत तक गिरकर खुले। मुद्रा बाजार सोमवार से बंद था, क्योंकि 31 मार्च को महावीर जयंती, 1 अप्रैल को नए वित्त वर्ष की शुरुआत और 3 अप्रैल को गुड फ्राइडे के कारण लगातार अवकाश रहा। गुरुवार को बाजार खुलते ही तेज गतिविधि देखने को मिली।

आरबीआई के सख्त नियमों का प्रभाव

आरबीआई ने बैंकों को रुपये से जुड़े नॉन-डिलीवेरेबल फॉरवर्ड सौदों की पेशकश करने से रोक दिया है, चाहे ग्राहक निवासी हों या अनिवासी। इसके अलावा कंपनियों को रद्द किए गए फॉरवर्ड अनुबंधों को दोबारा बुक करने की अनुमति नहीं दी गई है। सप्ताह की शुरुआत में ही केंद्रीय बैंक ने बैंकों की खुली मुद्रा स्थिति पर 100 मिलियन डॉलर की सीमा तय कर दी थी। साथ ही संबंधित पक्षों के साथ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों पर भी रोक लगा दी गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास 700 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार है, जो किसी भी सट्टा गतिविधि को रोकने और जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप कर रुपये को स्थिर रखने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।



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