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सफलता पद या पहचान से नहीं, प्रभाव से मापी जाती है: शिवाली गुप्ता

by Business Remedies
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चारु भाटिया | बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। आज के समय में, जब एक साथ कई काम करना अक्सर थकावट और तनाव का कारण बन जाता है, वहीं सेंटवेव संस्था की संस्थापक शिवाली गुप्ता संतुलित और उद्देश्यपूर्ण जीवन का उदाहरण हैं। वे बुद्धिमत्ता, संवेदनशीलता और उद्यमशीलता का सुंदर संगम हैं। एक रेडियो जॉकी और सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ से लेकर सामाजिक नवप्रवर्तक बनने तक की उनकी यात्रा यह दिखाती है कि जब मन में जुनून, लगन और उद्देश्य एक साथ मिलते हैं, तो समाज में स्थायी बदलाव लाया जा सकता है।
शिवाली आज की आधुनिक भारतीय नारी की प्रतीक हैं — परंपराओं में जड़ें रखने के साथ-साथ आगे की सोच रखने वाली, जो सहानुभूति और उद्यम, दोनों को साथ लेकर चलती हैं। सेंटवेव के माध्यम से उनका प्रयास केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, जागरूकता और सकारात्मकता की संस्कृति को आगे बढ़ाने का है। हाल ही में बिजनेस रेमेडीज टीम ने शिवाली गुप्ता से सेंटवेव संस्था के कार्यों और उद्देश्यों के बारे में विस्तार से बातचीत की।

रेडियो जॉकी, आईटी प्रोफेशनल और समाजसेवी जैसी भूमिकाएं आपने बखूबी निभाई हैं। यह सफर कैसे शुरू हुआ और सब कुछ कैसे संतुलित किया?

मेरा जन्म सवाईमाधोपुर में हुआ। शुरू में मेरा सपना निजी क्षेत्र में इंजीनियर बनने का था, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के कारण मैंने विज्ञान और बाद में अंग्रेजी साहित्य में परास्नातक किया। विवाह के बाद जयपुर आ गई, जहां मेरे पति उच्च न्यायालय में वकालत करते हैं। नई जिम्मेदारियों के बावजूद मैंने पढ़ाई जारी रखी और बी.एड व एलएलबी की पढ़ाई पूरी की।
मगर मेरा पहला प्यार हमेशा रेडियो ही रहा। छात्र जीवन से ही मैं रेडियो पर सुबह के कार्यक्रम प्रस्तुत करती थी। माइक्रोफोन मेरे लिए मन की अभिव्यक्ति का माध्यम है, जो मुझे लोगों की भावनाओं और कहानियों से जोड़ता है। रेडियो ने मुझे समाज, संवाद और संवेदनशीलता की गहराई सिखाई। इसके साथ ही मुझे पेंटिंग, बेकिंग और घरेलू कला जैसे रचनात्मक कार्य पसंद हैं — ये मेरे लिए आत्मशांति का साधन हैं।
वर्तमान में मैं लायंस सुपरस्टार क्लब की प्रशासक और लायनेस क्लब में सेमिनार प्रभारी के रूप में भी कार्यरत हूं। मेरा मानना है कि जो कार्य आपको खुशी देता है, उसके लिए समय अपने आप मिल जाता है।

 

सेंटवेव की शुरुआत कैसे हुई और इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?

सेंटवेव की शुरुआत मेरे निजी अनुभव से हुई। मुझे एक दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्या का सामना करना पड़ा, जिसके कारण जीवनशैली में बदलाव लाने पड़े। तब मैंने देखा कि विशेष रूप से महिलाओं में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता की बहुत कमी है। लगभग 90 प्रतिशत महिलाएं बीमारी के शुरुआती संकेतों को अनदेखा कर देती हैं और उन्हें तनाव या थकान मानकर टाल देती हैं।
इसने मुझे गहराई से प्रभावित किया और मैंने निश्चय किया कि इस जागरूकता की कमी को दूर करना है। सेंटवेव का उद्देश्य लोगों में स्वास्थ्य साक्षरता बढ़ाना है ताकि वे केवल लक्षणों को नहीं, बल्कि समय पर जांच और आत्म-देखभाल के महत्व को समझें।
हमारे कार्यक्रम ऐसे बनाए जाते हैं कि उनमें केवल जानकारी ही नहीं, बल्कि लोगों में भीतर से जागरूकता उत्पन्न हो। हम ऐसे सत्र आयोजित करते हैं जो चिकित्सा ज्ञान को भावनात्मक समझ से जोड़ते हैं।

 

जीवन की चुनौतियों के बीच आपने क्या सीखा?

सबसे बड़ा सबक है — अपेक्षाओं का सही प्रबंधन। अपने और दूसरों, दोनों के प्रति समझ जरूरी है। बदलाव हमेशा अपने भीतर से शुरू होता है।
धैर्य, सहनशीलता और करुणा मेरे जीवन के मूल मंत्र हैं। हर असफलता ने मुझे और मजबूत तथा जागरूक बनाया है।

 

सेंटवेव की प्रमुख पहलें कौन-सी रही हैं और आगे की योजना क्या है?

हमारा पहला कार्यक्रम सीके बिड़ला अस्पताल के लिए आयोजित किया गया था, जो जयपुर में स्वतंत्र स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों में से एक था। सेंटवेव को वर्ष 2017-18 में पंजीकृत किया गया, और तब से हमने कई संस्थानों, सरकारी विभागों और अस्पतालों के साथ साझेदारी की है।
अब हम साइबर सुरक्षा, सड़क सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर भी काम कर रहे हैं, क्योंकि स्वास्थ्य जागरूकता केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य से भी जुड़ी है।
हम राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय और कृषि विभाग के साथ मिलकर ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच बनाने की दिशा में भी कार्यरत हैं।
हमारा लक्ष्य सेंटवेव को एक टिकाऊ मॉडल बनाना है, जो स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण — तीनों को एक साथ जोड़ सके।

व्यावसायिक दृष्टि से सेंटवेव कैसे कार्य करता है?

कई अस्पतालों के पास कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत धन होता है, जो अक्सर सही दिशा में उपयोग नहीं हो पाता। सेंटवेव इन अस्पतालों के लिए एक सेतु का कार्य करता है।
हम ऐसे कार्यक्रम तैयार करते हैं, जो समाज के लिए उपयोगी हों और अस्पतालों के CSR उद्देश्यों से मेल खाते हों।
हमने हृदय रोग, आपातकालीन सहायता, नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर और मैमोग्राफी जैसी जांचों पर कई कार्यक्रम आयोजित किए हैं। अब तक मंगला प्लस, महावीर कैंसर अस्पताल और सीके बिड़ला जैसे प्रमुख संस्थानों के साथ काम किया है।
हमारा ध्यान हमेशा शिक्षा और सहभागिता पर केंद्रित रहता है।

 

कोविड के बाद स्वास्थ्य और जीवनशैली में क्या परिवर्तन आए हैं?

कोविड ने हमारे जीवन की सोच ही बदल दी है। घर से काम करने की आदत ने शरीर को कम सक्रिय और बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील बना दिया है। अब आत्म-अनुशासन और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना बेहद आवश्यक हो गया है।
इसके अलावा, लोगों ने यह भी समझा कि करियर में स्थिरता से ज्यादा महत्वपूर्ण है उद्देश्य और सहानुभूति। महामारी ने हमें सिखाया कि स्वास्थ्य विलासिता नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है।

 

युवाओं के लिए आपका संदेश क्या है, जो अपने करियर के साथ समाज के लिए भी काम करना चाहते हैं?

सबसे पहले अपने उद्देश्य को पहचानिए। जो बात आपके मन को सच में छूती है, वही आपकी दिशा है। अपने काम में निरंतरता रखिए और समाज के दबाव में मत आइए।
सफलता पद या पहचान से नहीं, प्रभाव से मापी जाती है।
आप चाहे इंजीनियर हों, कलाकार हों या तकनीकी विशेषज्ञ — समाज के लिए योगदान हर क्षेत्र से दिया जा सकता है। बस दृढ़ता जरूरी है।
मैं हमेशा कहती हूं, “अपना जुनून जियो, लेकिन अपने जुनून से दूसरों की सेवा भी करो।”
यही जीवन की सच्ची खुशबू है — यही असली सेंटवेव है।



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