घरेलू शेयर बाजार में सप्ताह की शुरुआत कमजोर रही और सोमवार को कारोबार के अंत तक प्रमुख सूचकांकों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के कारण निवेशकों में सतर्कता देखने को मिली। कारोबार के अंत में Nifty लगभग 24,000 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि Sensex करीब 1,400 अंकों की भारी गिरावट के साथ दिन का कारोबार समाप्त किया। दिनभर के कारोबार के दौरान बाजार में बिकवाली का दबाव बना रहा। विशेष रूप से वाहन, धातु, बैंकिंग और तेल से जुड़े क्षेत्रों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। निवेशकों ने जोखिम से दूरी बनाए रखते हुए कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में मुनाफावसूली की।
क्षेत्रवार प्रदर्शन की बात करें तो लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रीय सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। वाहन क्षेत्र, उपभोक्ता टिकाऊ सामान, धातु, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, तेल एवं गैस और निजी बैंकिंग से जुड़े शेयरों में करीब 2 से 4 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इससे पूरे बाजार का माहौल दबाव में रहा। मध्यम और छोटे आकार की कंपनियों के शेयर भी गिरावट से अछूते नहीं रहे। मध्यम आकार की कंपनियों का सूचकांक और छोटे आकार की कंपनियों का सूचकांक लगभग 2–2 प्रतिशत तक नीचे बंद हुए। इससे यह स्पष्ट हुआ कि बाजार में गिरावट केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक स्तर पर बिकवाली देखने को मिली।
दिन के कारोबार में कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में कमजोरी रही। टाटा मोटर्स यात्री वाहन, आयशर मोटर्स, बजाज ऑटो, अल्ट्राटेक सीमेंट और मारुति सुजुकी जैसे प्रमुख शेयरों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। इन कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दबाव पूरे वाहन और निर्माण क्षेत्र पर असर डालता दिखाई दिया। हालांकि, बाजार की इस गिरावट के बीच कुछ कंपनियों के शेयरों में मजबूती भी देखने को मिली। विप्रो, सन फार्मा, अपोलो हॉस्पिटल और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में खरीदारी का रुख दिखाई दिया। इसके अलावा इन्फोसिस के शेयर भी सकारात्मक दायरे में कारोबार करते नजर आए।
विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ रहा है। तेल महंगा होने से कई क्षेत्रों की लागत बढ़ने की आशंका रहती है, जिससे निवेशक सतर्क हो जाते हैं। इसके अलावा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को लेकर बनी अनिश्चितता भी बाजार की चाल को प्रभावित कर रही है। आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों की दिशा, कच्चे तेल की कीमतों और प्रमुख आर्थिक संकेतकों पर बनी रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिरता आती है तो घरेलू बाजार में भी सुधार की संभावना बन सकती है।

