चेन्नई,
राज्य में पर्यटन क्षेत्र के बड़े निवेश प्रस्तावों को तेजी से लागू करने के उद्देश्य से तमिलनाडु पर्यटन विकास निगम ने एक समर्पित पर्यटन सहायता प्रकोष्ठ का गठन किया है। यह व्यवस्था तमिलनाडु वैश्विक पर्यटन सम्मेलन 2026 के दौरान घोषित परियोजनाओं को तय समय सीमा में जमीन पर उतारने के लिए बनाई गई है। हाल ही में सम्पन्न सम्मेलन के दौरान कुल 127 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हुए थे, जिनमें लगभग 22,795 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश का आश्वासन मिला है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि इन निवेश प्रतिबद्धताओं को वास्तविक परियोजनाओं में बदला जाए ताकि पर्यटन ढांचा और रोजगार दोनों मजबूत हों।
एकल-खिड़की व्यवस्था से निवेशकों को सुविधा
सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार नया सहायता प्रकोष्ठ निवेशकों के लिए एकल-खिड़की सहायता प्रणाली के रूप में कार्य करेगा। इसका नेतृत्व पर्यटन निदेशक करेंगे। निवेशकों को आवश्यक दस्तावेज और आवेदन जमा करने के लिए एकीकृत डिजिटल मंच उपलब्ध कराया जाएगा। यह प्रकोष्ठ निवेशकों और विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय स्थापित करेगा, स्वीकृतियों की स्थिति की निगरानी करेगा तथा निर्धारित समय के भीतर मंजूरी दिलाने की प्रक्रिया सुनिश्चित करेगा। इससे प्रक्रियागत देरी कम होने की उम्मीद है। सम्मेलन से जुड़े प्रस्तावों तक सीमित न रहकर इस प्रकोष्ठ को व्यापक जिम्मेदारी भी दी गई है। यह राज्य के पर्यटन क्षेत्र में नए निवेश आकर्षित करेगा, निजी तथा सार्वजनिक-निजी भागीदारी परियोजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन करेगा तथा देश-विदेश के नए पर्यटक बाजारों तक पहुंचने के लिए प्रचार रणनीति तैयार करेगा। निजी निवेशकों को वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त करने में मार्गदर्शन भी दिया जाएगा और संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाएगा। राज्य भर में पर्यटन विकास पहलों की प्रगति पर प्रत्येक तीन माह में रिपोर्ट तैयार कर सार्वजनिक की जाएगी, ताकि जवाबदेही और पारदर्शिता बनी रहे। यह सहायता प्रकोष्ठ पर्यटन आयुक्त के नेतृत्व में कार्य करेगा और इसमें विभाग के संयुक्त निदेशक तथा पर्यटन विकास निगम के महाप्रबंधक सहित वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
सरकार को रोजगार वृद्धि की उम्मीद
पर्यटन मंत्री आर राजेंद्रन ने कहा कि यह नई संस्थागत व्यवस्था सम्मेलन में प्राप्त बड़े निवेश अवसरों को तेजी से लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सरकार निवेशकों को प्रारंभ से अंत तक सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है और तमिलनाडु को देश के प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में और मजबूत बनाना चाहती है। अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से कारोबार सुगमता बढ़ेगी और राज्य में व्यापक स्तर पर रोजगार सृजन होगा।

