Shri Krishna Janmashtami का त्योहार आज हर्षोंल्लास से मनाया जाएगा। इसे बेहद खास माना जाता है। इस पावन अवसर पर लाखों कृष्ण भक्त मंदिर में ठाकुर जी के बाल रूप के दर्शन करने पहुंचते हैं। खासकर मथुरा और वृंदावन में जन्माष्टमी की धूम रहती है। मान्यता है कि यहीं पर भगवान कान्हा ने जन्म लिया था। जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का प्रतीक है, जो अधर्म पर धर्म की विजय और प्रेम, भक्ति और ज्ञान का संदेश देता है। भगवान श्रीकृष्ण जी को भगवान श्री हरि विष्णु जी का पूर्ण अवतार अंश माना जाता है। प्रभु इस पावन धरती पर अवतरित हुए, वह भी मानव रूप में, जिससे हम सभी मानवों को यह शिक्षा दे सकें कि जीवन में हमारे सामने कितने ही कष्ट क्यों ना आ जाएं, हमें उनका डटकर सामना करना चाहिए। जन्माष्टमी के महान पर्व पर श्रीकृष्ण के जीवन से मिलने वाली उन महत्वपूर्ण सीखों को जानते हैं, जिनमें से यदि हम एक दो को भी अपने जीवन में उतार लें तो वास्तव में श्रीकृष्ण के उपदेशों का और उनके द्वारा प्रदान किए गए महान ब्रह्म ज्ञान का हमें फल मिल जाएगा और हमारा जीवन सफल हो जाएगा। श्रीकृष्ण ने सिखाया कि जीवन में चाहे कितनी भी चुनौतियां क्यों ना आ जाएं, हमें सदैव मुस्कुराते रहना चाहिए। इससे न केवल हमें देखकर अन्य लोग प्रेरित होंगे बल्कि हर समस्या को आसानी से सुलझाने में मदद मिलेगी। श्रीकृष्ण ने सुदामा और अन्य सखाओं के माध्यम से हमें यह सिखाया कि मित्रता एक ऐसा बड़ा और सच्चा धर्म है, जो ना तो जाति-पाति देखता है और ना ही किसी प्रकार की अमीरी या गरीबी। मित्र को मित्र के रूप में उसकी कमियों के साथ स्वीकार करना ही सच्ची मित्रता है। यही कारण है कि जगत आज भी श्रीकृष्णा और सुदामा की मित्रता का उदाहरण प्रस्तुत करता है। भगवान श्रीकृष्ण ने सभी से प्रेम का भाव दिया। श्रीकृष्ण का प्रेम मात्र स्त्री पुरुष का प्रेम नहीं, जो आजकल लोग सोचते हैं, बल्कि वह तो उससे कहीं ऊपर की बात है। वह संपूर्ण जगत को प्रेम देने वाले प्रभु हैं और वास्तव में वसुधैव कुटुंबकम का संदेश उन्हीं के द्वारा दिया गया है क्योंकि उनके अनुसार सभी जीवों से प्रेम करना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन में कभी गैया चराईं तो कभी पशु-पक्षियों और ग्वाल बालों के साथ खेले। उन्होंने जीवों पर दया और प्रेम भाव दिखाने के लिए भी हमें प्रेरित किया है।

