Mumbai,
हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत हल्की मजबूती के साथ हुई, लेकिन global geopolitical तनाव के कारण यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। ईरान से जुड़े हालात और अमेरिका की सख्त चेतावनी के चलते निवेशकों में चिंता बनी रही, जिसका असर बाजार पर साफ दिखाई दिया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तेहरान ने मंगलवार तक Strait of Hormuz को फिर से खोलने की समयसीमा पूरी नहीं की, तो गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इस बयान के बाद बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई। शुरुआती कारोबार में बढ़त के बाद Sensex 150 अंक यानी 0.21 प्रतिशत गिरकर 73,168 पर आ गया। वहीं Nifty भी 42 अंक यानी 0.19 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,670 पर कारोबार करता दिखा। कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखी गई, जिससे बाजार पर दबाव बना रहा। इससे पहले, बाजार की शुरुआत सकारात्मक रही थी, जहां Nifty 22,780 पर खुला था और 67 अंक यानी 0.30 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की थी। वहीं Sensex भी 158 अंक की बढ़त के साथ 73,477 के स्तर तक पहुंचा था।
शुरुआती समय में बैंकिंग और ऑटो क्षेत्र के शेयरों में मजबूती देखने को मिली थी, जिससे कुछ सेक्टर सूचकांक हरे निशान में थे। हालांकि, बाद में मेटल और फार्मा क्षेत्र में कमजोरी आने से बाजार का रुख बदल गया। विस्तृत बाजार में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में हल्की बढ़त दर्ज की गई, लेकिन overall निवेशकों का भरोसा कमजोर बना रहा। इस दौरान बाजार में अस्थिरता भी बढ़ी रही। इंडिया वीआईएक्स सूचकांक में 2 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई, जो निवेशकों की बढ़ती चिंता को दर्शाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के चलते बाजार में सतर्कता बनी हुई है। अभी तक किसी तरह का युद्धविराम समझौता नहीं हो पाया है, जिससे अनिश्चितता और बढ़ गई है।
हालांकि पिछले सप्ताह अमेरिकी बाजारों में रोजगार के मजबूत आंकड़ों के कारण बढ़त दर्ज की गई थी, लेकिन कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और geopolitical जोखिमों ने निवेशकों की भावना को कमजोर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सप्ताह भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक बाजार के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। यदि वैश्विक तनाव में कमी आती है, तो बाजार में फिर से सुधार देखने को मिल सकता है। घरेलू स्तर पर वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री में सुधार के संकेत मिले हैं, जिससे आर्थिक गतिविधियों में धीरे-धीरे सुधार की उम्मीद बढ़ी है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों ने अपनी बिकवाली जारी रखी और पिछले कारोबारी सत्र में उन्होंने 9,931 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 7,200 करोड़ रुपये से अधिक की खरीदारी कर बाजार को कुछ सहारा दिया। इस बीच, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने चिंता और बढ़ा दी है। ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 2 प्रतिशत बढ़कर 111.23 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो 52 सप्ताह के उच्च स्तर के करीब है। वहीं अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 3.53 प्रतिशत बढ़कर 115.48 डॉलर प्रति बैरल हो गया। एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। जापान का निक्केई लगभग 1 प्रतिशत ऊपर रहा, जबकि हांगकांग का हैंगसेंग करीब 1 प्रतिशत गिरा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक लगभग 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा।

