मुंबई,
भारतीय शेयर बाजार में आज शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट दर्ज की गई। कमजोर वैश्विक संकेतों और Metal Stocks में बिकवाली के चलते Sensex और Nifty दोनों निचले स्तर पर खुले। सुबह 9.23 बजे तक Sensex 254 अंक या 0.30 प्रतिशत गिरकर 83,563 पर पहुंच गया, जबकि Nifty 85 अंक या 0.33 प्रतिशत फिसलकर 25,690 पर कारोबार करता दिखा। मुख्य व्यापक सूचकांकों में भी नरमी रही। Nifty Midcap 100 में 0.04 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, जबकि Nifty Smallcap 100 0.31 प्रतिशत नीचे रहा। इससे संकेत मिलता है कि बड़े शेयरों के साथ-साथ मध्यम और छोटे शेयरों में भी दबाव बना हुआ है।
क्षेत्रीय सूचकांकों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। आईटी क्षेत्र वैश्विक तकनीकी शेयरों में गिरावट के बावजूद अपेक्षाकृत स्थिर रहा। सबसे अधिक गिरावट Metal सेक्टर में रही, जो 1.71 प्रतिशत नीचे रहा। रियल्टी क्षेत्र में 0.82 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। दूसरी ओर Nifty Oil And Gas सूचकांक 1.02 प्रतिशत की बढ़त के साथ प्रमुख बढ़त वाला क्षेत्र रहा। बाजार विश्लेषकों के अनुसार Nifty के लिए तत्काल सहारा 25,600–25,650 के दायरे में दिखाई दे रहा है, जबकि 25,900–25,950 का स्तर निकटतम अवरोध के रूप में देखा जा रहा है। उनका कहना है कि यदि Nifty इस सहारा स्तर को बनाए रखने में सफल रहता है तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है।
एशिया-प्रशांत बाजारों में भी सुबह के सत्र में अधिकतर सूचकांक लाल निशान में रहे। वॉल स्ट्रीट पर तकनीकी शेयरों में आई तेज गिरावट का असर एशियाई बाजारों पर पड़ा। चीन का शंघाई सूचकांक 1.03 प्रतिशत गिरा, जबकि शेनझेन 0.88 प्रतिशत नीचे रहा। जापान का निक्केई 0.73 प्रतिशत फिसला और हांगकांग का हैंग सेंग 1.07 प्रतिशत गिरा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 2.84 प्रतिशत नीचे बंद हुआ। अमेरिकी बाजारों में भी रातभर दबाव बना रहा। नैस्डैक 1.51 प्रतिशत गिरा, जबकि एस एंड पी 500 में 0.51 प्रतिशत की गिरावट आई। डाउ जोंस 0.53 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ।
एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार जनवरी महीने में विदेशी संस्थागत निवेशक अधिकांश क्षेत्रों में शुद्ध बिकवाल रहे, हालांकि Metal और पूंजीगत वस्तुओं के शेयरों में उन्होंने खरीदारी की। 4 February को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने Rs.30 करोड़ के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने Rs.250 करोड़ के शेयर खरीदे। विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और ऊंची अस्थिरता के बीच निवेशकों को चयनात्मक और अनुशासित रणनीति अपनानी चाहिए। बाजार में सुधार के दौरान मजबूत आधार वाली कंपनियों के शेयरों पर ध्यान देना दीर्घकाल में लाभकारी हो सकता है।

