Mumbai में शुक्रवार सुबह रुपया नई रिकॉर्ड कमज़ोरी पर ट्रेड करने लगा,
और US dollar के मुकाबले 24 पैसे गिरकर 90.56 पर पहुँच गया।
Currency पर दबाव मुख्य रूप से India-US trade deal में अनिश्चितता और लगातार FII outflows की वजह से रहा।
💱 Reasons Behind the Weakness | कमजोरी के प्रमुख कारण
Forex traders के अनुसार, रुपया कमजोर होने का मुख्य कारण importers द्वारा डॉलर की aggressive खरीदारी है,
खासकर global precious metals की बढ़ती कीमतों के बीच।
US currency की मजबूत मांग ने रुपये पर अतिरिक्त दबाव बनाया।
Interbank market में रुपया सुबह 90.43 से खुला और जल्दी ही 90.56 तक गिर गया,
जो पिछले दिन के 90.32 से 24 पैसे की decline को दर्शाता है।
🔮 Outlook Ahead | भविष्य का अनुमान
Experts का अनुमान है कि INR आने वाले सालों में मजबूत हो सकता है।
“हम उम्मीद करते हैं कि 2025 के बाकी हिस्से में रुपया 90 के नीचे रहेगा और 2026 तक
लगभग 86 प्रति डॉलर तक पहुँच सकता है।”
Weaker rupee कुछ export-oriented sectors जैसे IT, pharma, textiles को support करता है,
लेकिन इससे imported inflation की चिंता भी बढ़ती है, खासकर उन हिस्सों में जहाँ US tariffs के कारण pressure है।
📈 Equity Market Resilience | शेयर बाजार की मजबूती
रुपये की कमजोरी के बावजूद domestic equity markets positive zone में रहे।
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Sensex 170.40 points बढ़कर 84,988.53 पर बंद हुआ।
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Nifty 98.40 points बढ़कर 25,996.95 पर पहुंचा।
Experts ने कहा कि आज की equity strength दिखाती है कि market तकनीकी resilience को प्राथमिकता दे रहा है,
और currency pressure से अस्थायी रूप से decoupled है।
🌍 Global Cues | वैश्विक संकेत
Dollar index, जो US dollar की शक्ति को छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले मापता है, 0.02% बढ़कर 98.37 पर पहुँच गया।
Brent crude futures भी 0.67% बढ़कर USD 61.69 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहे थे।
💰 FII Outflows | विदेशी निवेशकों की निकासी
Foreign Institutional Investors ने लगातार equities से funds निकाले,
जिनकी कुल बिक्री ₹2,020.94 करोड़ के करीब रही (Thursday data के अनुसार)।

