नई दिल्ली | एजेंसी | भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने अपनी बहुप्रतीक्षित मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया। Reserve Bank of India (RBI) के गवर्नर Sanjay Malhotra ने बताया कि छह सदस्यीय समिति ने 3, 4 और 5 जून को हुई बैठक में आर्थिक और वित्तीय परिस्थितियों की विस्तृत समीक्षा के बाद सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है।
इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपनी नीति का रुख (पॉलिसी स्टांस) भी ‘न्यूट्रल’ बनाए रखा है।
वैश्विक चुनौतियों के बीच सतर्क रुख
Sanjay Malhotra ने कहा कि अप्रैल की पिछली मौद्रिक नीति बैठक के बाद वैश्विक आर्थिक माहौल और चुनौतीपूर्ण हो गया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और नाजुक युद्धविराम की स्थिति के कारण ऊर्जा कीमतों में तेज वृद्धि हुई है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। इसका असर आर्थिक विकास और महंगाई दोनों पर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि बढ़ती ऊर्जा लागत और आपूर्ति बाधाओं के कारण आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि भारत की अर्थव्यवस्था इन झटकों का सामना करने में सक्षम है और देश की आर्थिक मजबूती को और बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
महंगाई पर आरबीआई की नजर
Sanjay Malhotra ने बताया कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद खुदरा महंगाई (सीपीआई) अभी आरबीआई के लक्ष्य स्तर से नीचे बनी हुई है। इसका कारण यह है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों का पूरा असर अभी घरेलू बाजारों तक नहीं पहुंचा है। हालांकि आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ने की आशंका है और यह आरबीआई की निर्धारित ऊपरी सीमा के करीब पहुंच सकती है।
उन्होंने कहा कि महंगाई से जुड़े जोखिम बढ़े हैं, लेकिन मौजूदा हालात में ब्याज दरों में बदलाव करने के बजाय स्थिति को और स्पष्ट होने देने का फैसला लिया गया है। आरबीआई आगे भी आंकड़ों पर आधारित निर्णय लेगा और महंगाई तथा आपूर्ति पक्ष के दबावों पर करीबी नजर रखेगा।
आर्थिक गतिविधियां बनी हुई हैं मजबूत
गवर्नर ने कहा कि National Statistical Office (NSO) के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रही। निजी उपभोग, निवेश, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के मजबूत प्रदर्शन ने इस वृद्धि को समर्थन दिया।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव शुरू होने के बाद भी भारत की आर्थिक गतिविधियां काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं। विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के पीएमआई आंकड़े बताते हैं कि दोनों क्षेत्रों में मजबूती बनी हुई है और कारोबारी भरोसा भी सकारात्मक है।
खपत, निवेश और निर्यात में मजबूती
आरबीआई के अनुसार, उपभोक्ताओं का खर्च, विशेषकर विवेकाधीन खर्च, अब तक मजबूत बना हुआ है। वहीं, बढ़ती लागत के बावजूद निवेश गतिविधियों में भी तेजी बनी हुई है। अप्रैल में भारत के माल निर्यात में भी अच्छी वृद्धि दर्ज की गई, जबकि वैश्विक स्तर पर माल ढुलाई और बीमा लागत बढ़ी हुई है।
आरबीआई ने चेतावनी दी कि दक्षिण-पश्चिम मानसून में संभावित कमी का असर कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग पर पड़ सकता है। हालांकि सरकार की फसल विविधीकरण, जल संरक्षण, जल संचयन, जलवायु अनुकूल खेती और कम अवधि वाली फसलों जैसी योजनाएं इस प्रभाव को काफी हद तक कम करने में मदद कर सकती हैं।
शहरी खपत को मिलेगा समर्थन
गवर्नर ने कहा कि सेवा क्षेत्र की निरंतर मजबूती, जीएसटी सुधारों का सकारात्मक प्रभाव और रोजगार की अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति शहरी खपत को समर्थन देती रहेगी। हालांकि बढ़ती महंगाई घरेलू परिवारों की क्रय शक्ति पर कुछ दबाव डाल सकती है।
आरबीआई ने साफ किया है कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं, बढ़ती ऊर्जा कीमतों और महंगाई के जोखिमों को देखते हुए केंद्रीय बैंक सतर्क रुख बनाए रखेगा। फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन आने वाले महीनों में आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

