Friday, March 13, 2026 |
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Rajasthan में Processing Units की कमी

किसानों व व्यापारियों का सपना अधूरा: यूनिट कम होने से कम मिल रहा है लाभ

by Business Remedies
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  • बाजरा, ज्वार, मूंग और मसालों का कच्चा माल बाहर भेजना पड़ रहा
  • सरकारों की सुस्ती से राजस्थान कृषि उत्पादन में अग्रणी, लेकिन मुनाफे में पीछे
  • किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कच्चा माल बेचकर कमा रहे महज छोटा लाभ

बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। राजस्थान बाजरा, ज्वार, जीरा, धनिया, ईसबगोल, मूंगफली, मूंग, मोठ और चना जैसे फसलों के उत्पादन में देश में अग्रणी है, लेकिन प्रोसेसिंग यूनिट्स, वेयरहाउसिंग और कोल्ड स्टोरेज की कमी से कच्चा माल गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में जाता है। वहां तैयार उत्पाद देश महंगे दामों में बेचे जाते हैं, जबकि राजस्थान के किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कच्चा माल बेचकर 10-15 प्रतिशत तक ही लाभ कमा पाते हैं। 2024 में राजस्थान ने 40 लाख टन बाजरा और 11.75 लाख टन मूंग (31 प्रतिशत राष्ट्रीय उत्पादन) का उत्पादन किया, लेकिन प्रसंस्करण की कमी से 70 प्रतिशत कच्चा माल बाहर भेजा गया।

पिछले 10 वर्षों में प्रगति और कमियां: पिछले दशक (2015-2024) में राजस्थान में कृषि प्रसंस्करण और भंडारण में सीमित प्रगति हुई। 2019 में लागू कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय और निर्यात प्रोत्साहन नीति ने 100 प्राथमिक प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए 40 करोड़ रुपए का प्रावधान किया। 2024 तक जोधपुर, कोटा और श्रीगंगानगर में तीन कृषि निर्यात क्षेत्र स्थापित हुए, जिनमें जीरा, धनिया, और मोठ की 50 प्रोसेसिंग यूनिट्स शुरू हुईं। जयपुर, बाड़मेर और नागौर में 20 नई यूनिट्स ने बाजरा और मूंगफली प्रसंस्करण शुरू किया। वेयरहाउसिंग में 1,200 नई इकाइयां (कुल क्षमता 10 लाख टन) और 300 कोल्ड स्टोरेज (कुल क्षमता 2 लाख टन) बने। हालांकि, 7,000 से अधिक कोल्ड स्टोरेज की जरूरत के मुकाबले यह केवल 4 प्रतिशत ही हैं।

किसानों और कारोबारियों को लाभ: 2024 में प्रोसेसिंग यूनिट्स और वेयरहाउसिंग ने 600 करोड़ रुपए का अतिरिक्त लाभ दिया, जिसमें जयपुर के 10,000 से ज्यादा किसानों ने बाजरा और धनिया प्रसंस्करण से 18 प्रतिशत अधिक आय अर्जित की। हालांकि, कोल्ड स्टोरेज की कमी से मूंग और चना का 15 प्रतिशत उत्पादन खराब हुआ। नागौर और बाड़मेर में प्रोसेसिंग यूनिट्स ने स्थानीय किसानों को एमएसपी से 25 प्रतिशत अधिक मूल्य दिलाया।

रोजगार और राजस्व प्रभाव: पिछले 10 वर्षों में 1.8 लाख रोजगार (70 प्रतिशत ग्रामीण) सृजित हुए, जिसमें 40 प्रतिशत महिलाएं थीं। जयपुर, कोटा और जोधपुर में प्रसंस्करण इकाइयों ने 2024 में 1,200 करोड़ रुपए का राजस्व जोड़ा। फिर भी, गुजरात की तुलना में राजस्थान का निर्यात केवल 30 प्रतिशत है, क्योंकि वहां 5,000 से अधिक कोल्ड स्टोरेज हैं।

सरकारों ने किए सिर्फ वादे: कांग्रेस और भाजपा सरकारों के वादों के बावजूद, प्रोसेसिंग और भंडारण सुविधाओं की कमी से राजस्थान का कृषि क्षेत्र पिछड़ रहा है। 2025 में राजस्थान मिलेट प्रोत्साहन मिशन और नए निर्यात क्षेत्रों से 20 प्रतिशत राजस्व वृद्धि की उम्मीद है। सरकार को कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग में निवेश बढ़ाना होगा, ताकि किसानों को उचित लाभ और राज्य को आर्थिक समृद्धि मिले।

* प्रदेश में बाजरा 40 लाख टन पैदा होता है। इसमें से 16 लाख टन तो खाने में आ जाता है। बाड़मेर, जैसलमेर, शेखावटी अंचल में बाजरा खूब खाया जाता है। बाकी बचे बाजरे की कोई प्रोसेसिंग यूनिट राजस्थान में नहीं हैं। इसलिए बाहर भेजा जाता है। कुछ वर्ष पहले एक प्रोसेसिंग यूनिट राजस्थान में लगाई गई थी, लेकिन अब वह भी बंद हो चुकी है। अगर राजस्थान में प्रोसेसिंग यूनिट लगे तो बिस्किट, नूडल्स और पास्ता जैसी चीजें प्रदेश में ही बनने लगेंगी। इससे प्रदेश को राजस्व का लाभ होगा। अभी सारा माल तैयार होकर दूसरे राज्यों से राजस्थान आता है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए और उद्यमियों को सहूलियतें देकर यहां उद्यम लगाने के लिए आकर्षित करना चाहिए। यहां यूनिट लगेंगी तो प्रदेश को राजस्व भी मिलेगा। राजस्व बढ़ेगा तो राजस्थान समृद्ध होगा।
* बाबूलाल गुप्ता, चेयरमैन, राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ



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