भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बिगड़ती जा रही है। पाकिस्तान की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पिछले कुछ समय से संघर्ष कर रही है और सिंधु जल संधि के निलंबन से यह और भी अधिक प्रभावित हो रही है। आईएमएफ की ऋण किश्त लंबे समय तक पेट नहीं भर पाएगी क्योंकि सेना पहले अपने युद्ध कोष में पैसे जमा करेगी। वहीं अफगानिस्तान से अमेरिका के बाहर निकलने के साथ ही पश्चिमी सहायता कम हो गई है और चीन के जेट और ड्रोन के उपहार शर्र्तों के साथ आते हैं। आर्थिक हालतों के तहत पाकिस्तान की एक बड़ी कंपनी बिकने जा रही है। पाकिस्तान की सरकार देश की बड़ी एयरलाइन कंपनी पीआईए को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। इसके लिए सरकार की ओर से बिड भी मंगवानी शुरू कर दी है। जिसके पहले डेडलाइन 3 जून थी, जिसे बढ़ाकर 19 जून कर दिया गया है। वहीं पाक की बिगड़ती आर्थिक स्थिति को देखते हुए चीन ने एक बार फिर राहत का हाथ बढ़ाया है। चीन ने पाकिस्तान को 316 अरब रुपए का नया कर्ज देने का भरोसा दिया है, जिससे पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलने की उम्मीद है। मौजूदा समय में पाकिस्तान का फॉरेक्स रिजर्व 11.516 अरब डॉलर है। इस बार चीन यह कर्ज अमेरिकी डॉलर में नहीं, बल्कि चीनी युआन में देगा। यह कदम चीन की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत वह डॉलर और यूरो पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रहा है। इससे पहले पाक ने मार्च-अप्रैल, 2024 के दौरान चीन से लिए गए 1.3 अरब डॉलर के कर्ज का भुगतान कर दिया था, जो लगभग 7.5 फीसदी ब्याज दर पर मिला था। चीन ने मार्च से जून, 2025 के बीच परिपक्व होने वाले कर्जों को रिफाइनेंस करने का भी आश्वासन दिया है। अब देखना यह है कि क्या चाइना पाकिस्तान की आर्थिक हालतों को सुदृढ़ कर पाएगा? नहीं लगता कि पाकिस्तान पुन: पहले की तरह अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ा पाएगा।

