Friday, February 20, 2026 |
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NITI Aayog की नई रिपोर्ट से 2047 विकसित भारत और 2070 Net Zero लक्ष्य पर फोकस

by Business Remedies
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NITI Aayog द्वारा हाल ही प्रकाशित नए शोध से देश की दीर्घकालिक जलवायु रणनीति केंद्र में आ गई है। यह 2047 तक विकसित भारत बनाने के रास्ते बताती है और देश को 2070 तक Net Zero उत्सर्जन लक्ष्य तक ले जाने की राह पर भी रखती है। अनुमान है कि मौजूदा नीतियों में भारत को 2070 तक 14.7 लाख करोड़ डॉलर का कुल निवेश करना होगा और Net Zero के लिए निवेश 22.7 लाख करोड़ डॉलर होगा। इसका मतलब है कि आने वाले दशकों में हर साल औसतन 500 अरब डॉलर निवेश करना होगा।

मगर जलवायु में इस समय सालाना 135 अरब डॉलर निवेश ही हो रहा है, जिस कारण बड़ा अंतर लगातार बना हुआ है। अध्ययन के मुताबिक घरेलू पूंजी निर्माण के आशावादी अनुमान होने पर भी भारत 2070 तक 16.2 लाख करोड़ डॉलर ही जुटा पाएगा। इसके बाद भी लगभग 6.5 लाख करोड़ डॉलर की कमी रहेगी, जिसे मुख्यत: अंतरराष्ट्रीय पूंजी, रियायती कर्ज और अनुदानों से पूरा करना होगा।

इसमें चुनौतियां बुनियादी और कई तहों वाली हैं। देश की जलवायु में बदलाव की राह में पूंजी की ऊंची लागत और दीर्घकालिक रियायती कर्ज एवं अनुदान की कम उपलब्धता आड़े आ रही है। इस कारण खास तौर पर ऊर्जा भंडारण, हरित हाइड्रोजन और औद्योगिक डीकार्बनाइजेशन जैसे अधिक पूंजी खपत वाले क्षेत्रों में परियोजना की व्यावहारिकता घट जाती है। बढ़ते संरक्षणवाद, भू-राजनीतिक तनाव, बदलती वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और बिखरे हुए नीतिगत ढांचे से उपजी वैश्विक अनिश्चितताएं भी चिंता को बढ़ाती हैं।

राज्यों और क्षेत्रों में परियोजनाओं की कम और असमान आपूर्ति भी बताती है कि परियोजना तैयार करने और उसे अमल में लाने में कितना अंतर है। क्षेत्रों की तैयारी भी अलग-अलग है। नवीकरणीय ऊर्जा तेजी से बढ़ी है मगर Grid विस्तार, भंडारण क्षमता और स्वच्छ औद्योगिक तकनीकों में प्रगति धीमी रही है। रिपोर्टों ने तीव्र शहरीकरण, संसाधनों की कमी और कुशल मानव पूंजी की बढ़ती मांग को भी रेखांकित किया है, जिस कारण हरित ऊर्जा की ओर सफर जारी रखने में मजबूत बुनियादी ढांचे, हरित तकनीकों तथा श्रमबल में लक्षित निवेश की जरूरत सामने आती है।



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