नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) की सस्टेनेबल जीरो डिफेक्ट जीरो इफेक्ट (जेडईडी) सर्टिफिकेशन योजना के तहत अब तक करीब 9.49 लाख एमएसएमई पंजीकृत हो चुके हैं। मंगलवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, केंद्र सरकार महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं के स्वामित्व वाले एमएसएमई को जेडईडी सर्टिफिकेशन पर 100 प्रतिशत सब्सिडी भी दे रही है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि इस योजना के तहत उद्यमों को गुणवत्ता आधारित और पर्यावरण अनुकूल विनिर्माण प्रक्रियाएं अपनाने में मदद देने के लिए अब तक 913 करोड़ रुपए से अधिक की वित्तीय सहायता प्रदान की जा चुकी है।
घरेलू और वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मकता होगी मजबूत
एमएसएमई मंत्रालय का कहना है कि जेडईडी योजना का उद्देश्य छोटे और मध्यम उद्योगों को बेहतर उत्पादन प्रक्रियाएं अपनाने, गुणवत्ता मानकों में सुधार करने और पर्यावरण पर पडऩे वाले प्रभाव को कम करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इससे भारतीय एमएसएमई घरेलू और वैश्विक बाजारों में अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत कर सकते हैं। जीरो डिफेक्ट जीरो इफेक्ट (जेडईडी) पहल के तहत उद्योगों को उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाने के साथ-साथ पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम रखने के लिए प्रेरित किया जाता है। इसके जरिए उद्यमों को तकनीक, सिस्टम और उत्पादन प्रक्रियाओं में लगातार सुधार करने में मदद मिलती है।
जेडईडी प्रमाणित एमएसएमई को दिया जा रहा है प्रोत्साहन
योजना के तहत पंजीकृत उद्यमों में से 6.67 लाख एमएसएमई को ब्रॉन्ज, 6,700 को सिल्वर और 4,800 को गोल्ड सर्टिफिकेशन दिया जा चुका है। मंत्रालय के अनुसार, यह दर्शाता है कि बड़ी संख्या में छोटे उद्योग गुणवत्ता और पर्यावरणीय मानकों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। जेडईडी योजना का प्रभाव केवल सर्टिफिकेशन तक ही सीमित नहीं है। देश के 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने इसे अपनी औद्योगिक नीतियों का हिस्सा बनाया है और जेडईडी प्रमाणित एमएसएमई को अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है। इसके साथ ही 19 वित्तीय संस्थान ऐसे उद्यमों को प्रोसेसिंग शुल्क और ब्याज दरों में रियायत जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे उन्हें आसानी से वित्तीय सहायता मिल सके।
योजना उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाने के लिए करती है प्रेरित
मंत्रालय ने कहा कि महिला उद्यमियों के लिए दी जा रही 100 प्रतिशत सब्सिडी सर्टिफिकेशन की लागत को पूरी तरह खत्म कर देती है। इससे अधिक से अधिक महिला उद्यमियों को इस पहल से जुडऩे और अपने कारोबार को गुणवत्ता मानकों के अनुरूप विकसित करने का अवसर मिल रहा है। एमएसएमई मंत्रालय के अनुसार, जेडईडी योजना उद्योगों को उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाने के साथ-साथ पर्यावरण पर पडऩे वाले प्रभाव को कम करने के लिए प्रेरित करती है। इसके तहत उद्यमों को तकनीक, प्रबंधन प्रणाली और विनिर्माण प्रक्रियाओं में लगातार सुधार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जिससे गुणवत्ता, उत्पादकता और स्थिरता को बढ़ावा मिलता है।
पात्र एमएसएमई को कई तरह की वित्तीय सहायता उपलब्ध
योजना में शामिल पात्र एमएसएमई को विभिन्न प्रकार की वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है, जिसके तहत परीक्षण, सिस्टम या उत्पाद सर्टिफिकेशन की लागत का 75 प्रतिशत तक (अधिकतम 50,000 रुपए) सहायता के रूप में दिया जाता है। वहीं, परामर्श और हैंडहोल्डिंग सहायता के लिए 2 लाख रुपए तक, जबकि प्रदूषण नियंत्रण उपायों, स्वच्छ तकनीकों और जीरो इफेक्ट समाधान अपनाने के लिए 3 लाख रुपए तक की सहायता प्रदान की जाती है।

