Saturday, March 7, 2026 |
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मौद्रिक प्रबंधन में OMO पर नई रणनीति की जरूरत

SBI Research की रिपोर्ट में सुझाव

by Business Remedies
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RBI monetary policy update with bond yield movement and liquidity injection details

नई दिल्ली,

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा चालू वित्त वर्ष में रेपो दर में 125 आधार अंकों की कटौती करने और Open Market Operations के तहत सक्रिय रूप से Rs.6.6लाख करोड़ की तरलता डालने के बावजूद बॉन्ड यील्ड में अपेक्षित कमी नहीं आ रही है। SBI Research की बुधवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि इतनी बड़ी मात्रा में तरलता प्रबंधन के कारण बाजार के विभिन्न खंडों में असमान संचरण देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, मौद्रिक प्रबंधन के इतिहास में यह सबसे बड़ा OMO माना जा रहा है। नकद आरक्षित अनुपात से हुई तरलता, खरीद-बिक्री अदला-बदली और मुद्रा रिसाव को शामिल करने पर कुल तरलता प्रवाह लगभग Rs.5.5लाख करोड़ बैठता है।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्य कांति घोष ने कहा कि सकारात्मक पहलू यह है कि बैंकों की उधार दरों में कॉरपोरेट बॉन्ड यील्ड की तुलना में अधिक कमी आई है। इससे मूल्य निर्धारण के अंतर में कमी आई है और अब कंपनियां बाजार से उधार लेने की बजाय बैंकों से ऋण लेने की ओर लौट रही हैं। उच्च रेटिंग वाली कंपनियों में यह रुझान अधिक स्पष्ट दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग 65 प्रतिशत ऋण बाह्य बेंचमार्क आधारित उधार दर से जुड़े होने के कारण बैंकों की उधार दरों में तेजी से कमी आई है। वर्ष 2025 में ताजा रुपये ऋण पर भारित औसत उधार दर घटकर नवंबर 2025 में 8.71 प्रतिशत रह गई, जो 62 आधार अंकों की कमी दर्शाती है। हालांकि मासिक रुझान यह संकेत देते हैं कि अगस्त 2025 से मनी मार्केट दरों में वृद्धि हो रही है। दिसंबर में भी दरें नवंबर की तुलना में बढ़ीं, जबकि मौद्रिक नीति में और ढील दी गई थी। बॉन्ड बाजार में 10 वर्ष की AAA कॉरपोरेट बॉन्ड यील्ड, जो जून की शुरुआत तक घट रही थी, उसके बाद फिर बढ़ने लगी।

राज्य विकास ऋण के मामले में असमानता और स्पष्ट दिखाई देती है। अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान उधारी की भारित औसत यील्ड 7.16 प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में केवल 7 आधार अंक कम है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि RBI द्वारा 90 दिनों के लिए रेपो के तहत लिए गए संपूर्ण उधार को पूर्व भुगतान करने का निर्णय वैश्विक स्तर पर असामान्य कदम है। इससे बाजार में कुछ अस्थिरता आ सकती है, लेकिन यह तरलता प्रबंधन में नवाचार का संकेत भी देता है और इससे नई बोली रणनीतियां विकसित हो सकती हैं।

SBI Research ने सुझाव दिया है कि RBI को OMO ऐसे प्रतिभूतियों में करना चाहिए जो अधिक तरल हों, ताकि यील्ड पर सार्थक प्रभाव पड़े। उदाहरण के लिए वर्तमान 10 वर्ष की प्रतिभूति 6.48 प्रतिशत 2035 है। RBI इससे ठीक पहले की 10 वर्ष की 6.33 प्रतिशत 2035 प्रतिभूति में OMO कर सकता है, जिससे यील्ड कर्व में स्पष्ट संकेत मिल सके और विभिन्न बाजार खंडों में भरोसा लौट सके। रिपोर्ट में दोहराया गया है कि बैंकों की उधार दरों में आई अधिक गिरावट के कारण कंपनियों के लिए बैंक ऋण लेना बाजार से उधार लेने की तुलना में अधिक लाभकारी हो गया है, जिससे ऋण संरचना में बदलाव देखा जा रहा है।



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