मुंबई,
इस सप्ताह Indian stock market की चाल काफी हद तक मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव से प्रभावित हो सकती है। विश्लेषकों के अनुसार इन परिस्थितियों के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव और अस्थिरता देखने को मिल सकती है तथा निवेशकों की धारणा पर भी इसका असर पड़ेगा। पिछले कुछ दिनों में मध्य पूर्व क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसी कड़ी में कुवैत ने एहतियाती कदम उठाते हुए कच्चे तेल के उत्पादन और शोधन गतिविधियों को अस्थायी रूप से रोकने की घोषणा की है। बताया गया है कि ईरान से जुड़े संभावित खतरे के कारण तेल टैंकर फिलहाल फारस की खाड़ी से सुरक्षित रूप से गुजर नहीं पा रहे हैं। कुवैत की शाही सरकार ने इसे सावधानी के तौर पर उठाया गया कदम बताया है, हालांकि उत्पादन में कटौती की वास्तविक मात्रा का खुलासा नहीं किया गया है। ऊर्जा आपूर्ति में अनिश्चितता के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और अन्य वस्तुओं की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव की आशंका बढ़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे वस्तु आधारित महंगाई का खतरा भी बढ़ सकता है, जिससे केंद्रीय बैंकों और नीति निर्धारकों के सामने मौद्रिक नीति तय करने की चुनौती और जटिल हो सकती है।
पिछले सप्ताह भारतीय शेयर बाजारों में लगातार दबाव देखने को मिला। निवेशकों की बिकवाली के कारण बाजार में काफी अस्थिरता रही। सप्ताह के अंत में Nifty 50 सूचकांक 24,450 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि Sensex 78,919 अंक पर बंद हुआ। दोनों प्रमुख सूचकांकों में साप्ताहिक आधार पर लगभग 2.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं Bank Nifty लगभग 57,783 के स्तर पर बंद हुआ और इसमें 4.5 प्रतिशत की गिरावट रही, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि बैंकिंग क्षेत्र का प्रदर्शन व्यापक बाजार की तुलना में कमजोर रहा। एलकेपी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ तकनीकी विश्लेषक रूपक डे के अनुसार तकनीकी दृष्टि से बाजार अभी भी अपने पिछले निचले स्तर से नीचे बना हुआ है, जो कमजोरी का संकेत देता है। उनके अनुसार अल्पावधि में सूचकांक में और गिरावट की संभावना बनी रह सकती है और यह 24,000 या उससे नीचे के स्तर की ओर जा सकता है।
विश्लेषकों का यह भी कहना है कि ऊपरी स्तर पर 25,000 के आसपास मजबूत अवरोध बना हुआ है। जब तक बाजार इस स्तर को निर्णायक रूप से पार नहीं करता, तब तक तेजी आने की संभावना कम है और बाजार में ऊंचाई पर बिकवाली की रणनीति हावी रह सकती है। रिलिगेयर ब्रोकिंग के अनुसंधान विभाग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजीत मिश्रा का मानना है कि इस अस्थिर माहौल में कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में निवेश के अवसर बन सकते हैं। विशेष रूप से औषधि क्षेत्र, रक्षा क्षेत्र, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, चुनिंदा धातु कंपनियां और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों में चयनात्मक खरीदारी देखी जा सकती है। इसके विपरीत बैंकिंग, रियल एस्टेट, सूचना प्रौद्योगिकी तथा कुछ उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों पर दबाव बना रह सकता है।
निवेशक इस सप्ताह वैश्विक घटनाक्रमों पर विशेष नजर रखेंगे। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों की चाल और 12 March को जारी होने वाले उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (महंगाई) के आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हाल में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के बाद महंगाई के दबाव को लेकर बाजार में चिंता बढ़ी है। इसके अलावा निवेशक भारत के विदेशी मुद्रा भंडार से जुड़े आंकड़ों पर भी नजर रखेंगे, जिससे देश की बाहरी आर्थिक स्थिति और वित्तीय मजबूती का आकलन किया जा सकेगा। पिछले सप्ताह कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने चेतावनी दी थी कि यदि मध्य पूर्व में युद्ध कुछ और दिनों तक जारी रहता है तो खाड़ी क्षेत्र के तेल निर्यातक देश आपूर्ति रोकने की स्थिति घोषित कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में कच्चे तेल की कीमत कुछ ही हफ्तों में प्रति बैरल 150 डॉलर तक पहुंच सकती है, जबकि प्राकृतिक गैस की कीमत 40 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू तक बढ़ने की आशंका जताई गई है।

