बिजऩेस रेमेडीज/नई दिल्ली भारत की सबसे बड़ी Digital Healthcare Compnay, MediBuddy ने नए शोध आंकड़ जारी किए हैं, जिसमें शहरी कामकाजी महिलाओं में Anemia में उल्लेखनीय गिरावट का खुलासा हुआ है और ऐसा बेहतर निवारक देखभाल, समय पर जांच तथा बेहतर पोषण जागरूकता के कारण संभव हुआ। इस अध्ययन में 4,397 शहरी कॉर्पोरेट कर्मचारियों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया, जिसमें पाया गया कि सर्वेक्षण में शामिल 32.67 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीडि़त थीं – राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5, 2019-21) द्वारा 15-49 आयु वर्ग की महिलाओं के लिए बताए गए 56.5 प्रतिशत के राष्ट्रीय शहरी औसत की तुलना में यह उल्लेखनीय कमी है। पुरुष कर्मचारियों में हमारे शोध के अनुसार एनीमिया की दर केवल 5.63 प्रतिशत पाई गई और NFHS-5 डेटा भी दर्शाता है कि उसी आयु वर्ग के शहरी पुरुषों में औसत एनीमिया दर 25 प्रतिशत से कम है।
इस सुधार का श्रेय स्वास्थ्य साक्षरता में वृद्धि, नियमित जांच, समय पर हस्तक्षेप और संतुलित आहार को बढ़ावा देने वाले कॉर्पोरेट वेलनेस कार्यक्रमों तक विस्तारित पहुंच जैसे कारकों को जाता है। अध्ययन के अनुसार, 40-50 वर्ष की आयु की कामकाजी महिलाएं सबसे कमज़ोर समूह के रूप में उभरीं, जो सभी एनीमिया पीड़ित महिला उत्तरदाताओं का 26.44 प्रतिशत थीं, जो संभवत: उम्र से संबंधित हार्मोनल बदलाव और पोषण संबंधी उच्च आवश्यकताओं के कारण था। पुरुषों में, 40-50 आयु वर्ग में सबसे अधिक मामले (4.40 प्रतिशत) दर्ज हुए, जो यह दर्शाता है कि उम्र से संबंधित जीवनशैली और आहार संबंधी कारक महिला-पुरुष दोनों के लिए एनीमिया के जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं।
राज्य-वार स्तर पर, महाराष्ट्र में एनीमिया से पीडि़त कर्मचारियों की संख्या सबसे अधिक (कुल नमूने का 3.66 प्रतिशत) दर्ज की गई, उसके बाद कर्नाटक, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल का स्थान रहा। हालांकि, केरल, मध्य प्रदेश और गुजरात सहित कई राज्यों ने अपेक्षाकृत कम एनीमिया प्रसार प्रदर्शित किया – जो क्षेत्रीय असमानताओं और स्थानीय स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रमों और आउटरीच प्रयासों के प्रभाव को उजागर करता है। क्षेत्रीय और लैंगिक अंतर के बावजूद, समग्र डेटा Anemia के मामले में शहरी कर्मचारियों के स्वास्थ्य में सकारात्मक प्रगति का संकेत देता है। MediBuddy अध्ययन से पता चलता है कि पिछले पांच वर्षों में शहरी कर्मचारियों में एनीमिया का प्रसार घटकर सिर्फ 12.14 प्रतिशत रह गया है – एनएफएचएस-5 (2019-21) में बताए गए 40 प्रतिशत+ राष्ट्रीय औसत की तुलना में यह एक महत्वपूर्ण सुधार है। यह गिरावट शहरी कार्यबल में बेहतर स्वास्थ्य साक्षरता और शुरुआती हस्तक्षेप, विशेष रूप से नियमित स्वास्थ्य जांच के माध्यम से, के सकारात्मक प्रभाव को पुष्ट करती है।
MediBuddy में चिकित्सा संचालन प्रमुख, डॉ. गौरी कुलकर्णी ने शुरुआत में ही पहल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शहरी महिलाओं में एनीमिया के प्रसार में कमी एक उत्साहजनक संकेत है कि कॉर्पोरेट भारत निवारक स्वास्थ्य सेवा के महत्व को समझ रहा है। नियमित स्वास्थ्य जांच, कार्यस्थल पर पोषण संबंधी पहलों और समय पर निदान की बेहतर पहुंच ने कई महिलाओं को पोषक तत्वों की कमी को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने और उसे उलटने में सक्षम बनाया है। हालांकि, इस अंतर को पूरी तरह से पाटने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है – विशेष रूप से सबसे कमज़ोर आयु समूहों के लिए। MediBuddy के निष्कर्ष नियमित रक्त परीक्षण, आयरन सप्लीमेंट के कार्यक्रम और आहार परामर्श के माध्यम से निवारक स्वास्थ्य में निरंतर निवेश की आवश्यकता पर बल देते हैं।

