New Delhi,
सोशल मीडिया मंच एक्स के सह-संस्थापक जैक डॉर्सी ने अपनी वित्तीय सेवा कंपनी ब्लॉक में बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की घोषणा की है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित बदलावों के चलते कंपनी अपने कुल कार्यबल में 40 प्रतिशत की कटौती करेगी। इस निर्णय के तहत लगभग 4,000 कर्मचारियों को एक झटके में बाहर का रास्ता दिखाया गया है। जैक डॉर्सी ने एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि कंपनी का कर्मचारी आधार 10,000 से अधिक से घटाकर 6,000 से कम किया जाएगा। जिन कर्मचारियों पर यह असर पड़ेगा, उन्हें या तो सेवा से मुक्त किया जाएगा या परामर्श आधारित भूमिका में रखा जाएगा। यह फैसला कंपनी की कार्यप्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों के बढ़ते उपयोग के अनुरूप लिया गया है।
डॉर्सी ने स्पष्ट किया कि यह कदम किसी वित्तीय संकट के कारण नहीं उठाया गया है। उन्होंने कहा कि कंपनी का व्यवसाय मजबूत है, सकल लाभ में लगातार वृद्धि हो रही है, ग्राहकों की संख्या बढ़ रही है और लाभप्रदता में भी सुधार दर्ज किया जा रहा है। उनके अनुसार, छोटे और अधिक सक्षम दलों के साथ नई कार्यशैली को अपनाना समय की मांग बन गया है, जिससे कंपनी के निर्माण और संचालन का तरीका मूल रूप से बदल रहा है। प्रभावित कर्मचारियों को 20 सप्ताह का वेतन तथा प्रत्येक सेवा वर्ष के लिए अतिरिक्त एक सप्ताह का वेतन दिया जाएगा। इसके साथ ही मई के अंत तक निहित अंशधारिता लाभ, छह माह की स्वास्थ्य सुविधा, कंपनी द्वारा उपलब्ध कराए गए उपकरण तथा संक्रमण में सहायता के लिए 5,000 अमेरिकी डॉलर की राशि भी प्रदान की जाएगी। डॉर्सी ने कहा कि बार-बार छोटी छंटनी करने के बजाय एक बार में बड़ा और निर्णायक निर्णय लेना कर्मचारियों के मनोबल, कार्य पर ध्यान और ग्राहकों व अंशधारकों के भरोसे के लिए बेहतर होता है।
प्रौद्योगिकी उद्योग में यह रुझान तेजी से बढ़ रहा है। कई उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 12 से 18 महीनों में कंप्यूटर आधारित अधिकांश श्वेतपोश कार्यों का स्वचालन संभव है। इसी क्रम में अमेरिकी प्रौद्योगिकी दिग्गज ओरेकल ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डाटा केंद्र क्षमता बढ़ाने के लिए 20,000 से 30,000 नौकरियां समाप्त करने की योजना बनाई है। वहीं अमेज़न ने भी अपनी कृत्रिम बुद्धिमत्ता पुनर्गठन योजना के तहत 16,000 कर्मचारियों की छंटनी की घोषणा की है। इस बीच एक हालिया रिपोर्ट में पीडब्ल्यूसी इंडिया ने अनुमान जताया है कि वर्ष 2035 तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारत की अर्थव्यवस्था में लगभग 550 अरब अमेरिकी डॉलर का योगदान दे सकती है। यह योगदान कृषि, शिक्षा, ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा और विनिर्माण जैसे पांच प्रमुख क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जहां एक ओर कृत्रिम बुद्धिमत्ता से उत्पादकता और दक्षता बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर रोजगार के स्वरूप में व्यापक बदलाव भी आएगा।

