मुंबई,
देश में आधारभूत ढांचे के तेजी से विस्तार, विनिर्माण क्षेत्र की बढ़ती गतिविधियों और नीतिगत प्रोत्साहन के चलते भारत में 30 उच्च संभावनाओं वाले औद्योगिक और भंडारण केंद्र उभरकर सामने आए हैं। यह जानकारी गुरुवार को जारी एक नई रिपोर्ट में दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, इन 30 में से 8 शहर पहले से स्थापित बाजार के रूप में विकसित हो चुके हैं, जबकि रियल एस्टेट सलाहकार कंपनी कॉलियर्स इंडिया ने 22 अन्य शहरों को उभरते और प्रारंभिक चरण के केंद्र के रूप में चिन्हित किया है। इन शहरों की पहचान केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा विकसित किए जा रहे औद्योगिक क्षेत्रों तथा पांच प्रमुख मानकों पर आधारित विश्लेषण के आधार पर की गई है। इन मानकों में रणनीतिक औद्योगिक और माल ढुलाई गलियारों के साथ बेहतर संपर्क, प्रस्तावित औद्योगिक स्मार्ट शहर, बहु-माध्यमीय लॉजिस्टिक पार्क, समुद्री बंदरगाह और हवाई अड्डों से संपर्क का विस्तार तथा बड़े एकीकृत वस्त्र केंद्रों का विकास शामिल है।
वर्तमान में भारत का विनिर्माण क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 17 प्रतिशत योगदान देता है। अनुमान है कि वर्ष 2035 तक यह हिस्सेदारी बढ़कर करीब 25 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इस पृष्ठभूमि में औद्योगिक और भंडारण क्षेत्र को उच्च वृद्धि वाले क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है। आधुनिक और सुव्यवस्थित गोदामों की मांग बढ़ने तथा संस्थागत निवेश में मजबूती के कारण इस क्षेत्र में तेजी आने की संभावना है। कॉलियर्स इंडिया के औद्योगिक और लॉजिस्टिक सेवाओं के प्रबंध निदेशक विजय गणेश ने कहा कि औद्योगिक और माल ढुलाई गलियारों का विस्तार, बहु-माध्यमीय लॉजिस्टिक पार्क, स्मार्ट औद्योगिक शहर और बड़े समुद्री व हवाई अड्डा विस्तार परियोजनाएं इस क्षेत्र में अगली वृद्धि लहर को मजबूती देंगी।
हाल ही में प्रस्तुत केंद्रीय बजट में भी घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया है, जिससे आर्थिक विकास को देशभर में संतुलित रूप से फैलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत प्रत्येक सिटी इकोनॉमिक रीजन के लिए 5,000 करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा की गई है। जीवन विज्ञान, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, रसायन, दुर्लभ खनिज और वस्त्र जैसे प्रमुख क्षेत्रों में लक्षित हस्तक्षेप से स्थापित बाजारों में दीर्घकालिक भंडारण वृद्धि को बल मिल सकता है और साथ ही उभरते शहरों में निवेश के नए अवसर खुल सकते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि चिन्हित 30 उच्च संभावनाओं वाले औद्योगिक और भंडारण केंद्र देश के उत्तरी, दक्षिणी, पश्चिमी, पूर्वी और मध्य क्षेत्रों में संतुलित रूप से फैले हुए हैं, जो समग्र और समान विकास को दर्शाते हैं।
इनमें से 8 प्रमुख केंद्र ऐसे हैं जहां पहले से ही मजबूत मांग मौजूद है और आने वाले वर्षों में इनके और परिपक्व होने की उम्मीद है। अनुमान है कि वर्ष 2030 तक शीर्ष 8 शहरों में औद्योगिक और भंडारण मांग 5 करोड़ वर्ग फुट से अधिक हो सकती है। इसके अलावा 12 उभरते केंद्र आने वाले कुछ वर्षों में महत्वपूर्ण गति पकड़ सकते हैं, क्योंकि यहां महत्वपूर्ण औद्योगिक गलियारे, लॉजिस्टिक पार्क और बहु-माध्यमीय केंद्र विकसित हो रहे हैं। वहीं 10 प्रारंभिक चरण के केंद्र ऐसे शहर हैं जहां बुनियादी ढांचे की उपलब्धता, नीतिगत समर्थन और निवेशकों की तत्परता के आधार पर धीरे-धीरे प्रभाव दिखाई देगा।

