बिजनेस रेमेडीज/नई दिल्ली। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) और सीमा शुल्क की जटिल प्रक्रियाएं, आयात अंकुश और घरेलू निहित स्वार्थ जैसे मुद्दे भारतीय परिधान क्षेत्र की निर्यात वृद्धिको रोक रहे हैं।
शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने यह बात कही है। जीटीआरआई का कहना है कि निर्यातकों की समस्या की जड़ में गुणवत्ता वाले कच्चे कपड़े, विशेष रूप से सिंथेटिक कपड़े हासिल करने में कठिनाई है। जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘बांग्लादेश और वियतनाम के विपरीत, जहां निर्यातकों को आसानी से गुणवत्ता वाले आयातित कपड़े मिलते हैं, भारतीय निर्यातकों को रोजाना संघर्ष करना पड़ता है। कपड़ों पर उच्च आयात शुल्क, डीजीएफटी और सीमा शुल्क की जटिल प्रक्रियाओं की वजह से निर्यातकों को हर इंच आयातित कपड़े के लिए हिसाब लगाना पड़ता है और संघर्ष करना पड़ता है।’’ उन्होंने कहा कि पॉलिएस्टर और विस्कोस स्टेपल फाइबर जैसे कच्चे माल पर अनिवार्य गुणवत्ता मानदंड लागू करने से आयात जटिल हो रहा है क्योंकि बीआईएस (भारतीय मानक ब्यूरो) धीमी गति से विदेशी आपूर्तिकर्ताओं को पंजीकृत करता है।

