New Delhi,
भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर ने वर्ष 2026 की पहली तिमाही (January-March) में संस्थागत निवेश के मामले में वर्ष 2022 के बाद का सबसे उच्च स्तर दर्ज किया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में कुल 1.4 अरब डॉलर का निवेश दर्ज किया गया, जो सेक्टर में मजबूत भरोसे को दर्शाता है। हालांकि पिछली तिमाही के उच्च आधार के कारण तिमाही आधार पर निवेश में 62 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली, लेकिन सालाना आधार पर इसमें 74 प्रतिशत की तेज बढ़त दर्ज की गई। यह दर्शाता है कि वैश्विक आर्थिक दबावों के बावजूद भारत का रियल एस्टेट बाजार निवेशकों के लिए आकर्षक बना हुआ है।
वाणिज्यिक संपत्तियों में सबसे अधिक निवेश
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक क्षमता केंद्रों (GCCs) की मजबूत मांग के चलते वाणिज्यिक संपत्तियों में निवेश का दबदबा रहा। कुल निवेश में इस श्रेणी की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 38 प्रतिशत थी। यह वृद्धि दर्शाती है कि कार्यालय और व्यावसायिक परिसंपत्तियों की मांग लगातार बढ़ रही है। मूल्य के आधार पर, इस श्रेणी में 1.1 अरब डॉलर से अधिक का निवेश हुआ, जो सालाना आधार पर 266 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़त को दिखाता है, हालांकि तिमाही आधार पर इसमें 51 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
आवासीय क्षेत्र में गिरावट, लेकिन हिस्सेदारी में हल्की बढ़त
दूसरी ओर, आवासीय संपत्तियों में निवेश में कमी देखी गई। Q1 2026 में यह घटकर 0.2 अरब डॉलर रह गया, जो तिमाही आधार पर 53 प्रतिशत और सालाना आधार पर 59 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है। फिर भी, कुल निवेश में आवासीय क्षेत्र की हिस्सेदारी थोड़ी बढ़कर 15 प्रतिशत हो गई, जो पिछली तिमाही में 12 प्रतिशत थी। इससे संकेत मिलता है कि मांग में धीरे-धीरे स्थिरता आ रही है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच घरेलू निवेशकों की भूमिका तेजी से बढ़ी है। Q1 2026 में कुल निवेश में घरेलू निवेश की हिस्सेदारी बढ़कर 72 प्रतिशत हो गई, जो पिछली तिमाही में 22 प्रतिशत थी। यह बदलाव दर्शाता है कि विदेशी निवेश में कुछ कमी आने के बावजूद घरेलू पूंजी बाजार की गति को बनाए रख रही है।
विशेषज्ञों की राय
वेस्टियन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीनिवास राव ने कहा कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत का रियल एस्टेट सेक्टर मजबूती दिखा रहा है। उन्होंने बताया कि घरेलू निवेश की तेज वृद्धि बाजार को स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उनके अनुसार, वाणिज्यिक संपत्तियों में GCC आधारित मांग लगातार निवेशकों का भरोसा मजबूत कर रही है, जिससे भारत दीर्घकालिक निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य बना हुआ है। रियल एस्टेट सेक्टर में इस मजबूत निवेश प्रवाह का असर शेयर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है, जहां इस क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों की रुचि बढ़ने की संभावना है।

