Tuesday, July 14, 2026 |
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भारत में डिजिटल अरेस्ट का मुद्दा बनता गंभीर

by Business Remedies
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भारत में लगातार डिजिटल अरेस्ट का मुद्दा गंभीर बनता जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पिछले माह ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी इसका हवाला दिया था।जहां डिजिटल अरेस्ट ऑनलाइन धोखाधड़ी का एक नया तरीका है, जिसमें कुछ लोग खुद को पुलिस या सरकारी कर्मचारी बताकर लोगों को डराने की कोशिश करते हैं। ये ठग वीडियो कॉल के जरिए हर समय व्यक्ति की हरकतों पर नजर रखते हैं कि आप क्या कर रहे हैं, कहां जा रहे हैं और किससे बात कर रहे हैं। एक तरह से वीडियो कॉल की मदद से ये ठग व्यक्ति को घर में ही नजरबंद कर देते हैं। ये ठग पुलिस गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं और इस गिरफ्तारी से बचने के लिए लोग इनकी बात मान लेते हैं। इसके बाद ये ठग धीरे-धीरे जांच का डर दिखाकर लोगों से पैसे ट्रांसफर करने को कहते हैं। असल में कभी डिजिटल अरेस्ट तो कभी निवेश और जॉब के नाम पर ठगी। आए दिन हजारों लोग जालसाजों की बातों में आकर अपनी मेहनत की कमाई गंवा रहे हैं। दरअसल यह जालसाजी और लूटने की आधुनिकतम प्रौद्योगिकी है। ये अपराधी पढ़े-लिखे इंजीनियर नहीं, बल्कि बेहद औसत किस्म के होते हैं, लेकिन वे ‘साइबर अपराध’ के पक्के खिलाड़ी हैं। हरेक जालसाजी में एक पुलिस वाला होता है, जिसकी वर्दी नकली होती है। उसके अलावा, सीबीआई, ईडी, कस्टम, नारकोटिक्स, कभी-कभार रिजर्व बैंक आदि का प्रतिनिधि भी बताते हैं। नकली सर्वोच्च अदालत भी दिखा दी जाती है और फर्जी वारंट भी पेश कर दिया जाता है। वर्तमान में भारत की बड़ी आबादी सोशल नेटवर्किंग साइट्स का उपयोग करती है। भारत में सोशल नेटवर्किंग साइट्स के उपयोग के प्रति लोगों में जानकारी का अभाव है। इसके साथ ही अधिकतर सोशल नेटवर्किंग साइट्स के सर्वर विदेश में हैं, जिससे भारत में साइबर अपराध घटित होने की स्थिति में इनकी जड़ तक पहुंच पाना कठिन होता है। साइबर अपराधी वाट्सएप पर ग्रुप बना रहे हैं। उस गु्रप में गिरोह के कुछ लोग पहले से शामिल होते है। भारत में इन अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए साइबर सुरक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, जागरूकता बढ़ाना, प्रभावी साइबर सुरक्षा उपायों को लागू करना और सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना आवश्यक है। इन रणनीतियों को लागू करके तथा एक सक्रिय और सहयोगात्मक दृष्टिकोण को अपनाकर, भारत ऑनलाइन अपराधों को काफी हद तक कम कर सकता है और अपने नागरिकों एवं व्यवसायों के लिए एक सुरक्षित डिजिटल वातावरण बना सकता है।



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