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रूस से कच्चा तेल आयात करने वाला भारत सबसे बड़ा ग्राहक

by Business Remedies
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भारत यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदने वाला सबसे बड़ा ग्राहक बन गया है। भारत का रूस से कच्चा तेल आयात नवंबर में चार प्रतिशत बढक़र पांच महीनों में सबसे अधिक 2.6 अरब यूरो तक पहुंच गया। इस तेल से परिष्कृत ईंधन की बड़ी मात्रा ऑस्ट्रेलिया को निर्यात की गई। भारत का रूस से तेल आयात लगभग 1.6 मिलियन बैरल प्रति दिन है, जो भारत के कुल तेल आयात का लगभग 34 फीसदी है। जहां भारत, रूस से भारी मात्रा में तेल आयात कर रहा है, जो उसके कुल आयात का एक बड़ा हिस्सा है, लेकिन हाल ही में अमेरिकी प्रतिबंधों और उच्च शिपिंग लागत के कारण इसमें कुछ कमी आई है और निर्भरता घटाने के प्रयास में अमेरिका, यूएई, सऊदी अरब, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका जैसे अन्य स्रोतों से आयात बढ़ा रहा है, हालांकि रूसी तेल पर निर्भरता कम होने की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं है क्योंकि यह भू-राजनीतिक और आर्थिक कारकों पर निर्भर करेगा, पर भारत अपने स्रोतों में विविधता ला रहा है। यूक्रेन युद्ध के लिए रूस की धन आपूर्ति सीमित करने के इरादे से यह पाबंदी लगाई गई थी। इन प्रतिबंधों के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचपीसीएल, एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड ने रूसी तेल का आयात अस्थायी रूप से रोक दिया है। हालांकि इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां अब भी गैर-प्रतिबंधित रूसी आपूर्तिकर्ताओं से खरीद जारी रखे हुए हैं। नवंबर में जहां निजी तेल कंपनियों के आयात में हल्की गिरावट आई, वहीं सरकारी तेल कंपनियों ने रूसी कच्चे तेल की खरीद 22 प्रतिशत बढ़ा दी है। भारत की रूस पर निर्भरता कब तक कम होगी, यह कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे कि वैश्विक तेल बाजार की स्थिति, अमेरिकी प्रतिबंध और भारत की ऊर्जा सुरक्षा आवश्यकताएं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की रूस पर निर्भरता कम होने में समय लगेगा, क्योंकि रूस से तेल आयात करना भारत के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद है। वैसे तो केंद्र सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा और विविधता को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें से एक है तेल आयात के स्रोतों का विस्तार करना।



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