Monday, June 29, 2026 |
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तकनीकी अपनाने में भारत तेजी से बढ़ता आगे

by Business Remedies
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  • एआई, एनर्जी टैक्नोलॉजी, रोबोटिक्स और ऑटोनोमस सिस्टम मे भारत में काम रही कंपनियों में भारी निवेश
  • इस क्षेत्र में भारत व अमरीका काफी अग्रणी

बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। नई प्रौद्योगिकी (तकनीकी) अपनाने में भारत दुनिया के दूसरे देशों से काफी आगे है। इस क्षेत्र में भारत में काफी निवेश हो रहा है। भारत ने इस क्षेत्र में अपने प्रतिस्पर्धियों को पीछे छोडऩे की दिशा में कदम आगे बढ़ाए हैं। हाल ही में विश्व आर्थिक मंच की ओर से जारी रिपोर्ट फ्यूचर ऑफ जॉब्स में कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई), एनर्जी टैक्नोलॉजिज, रोबोटिक और ऑटोनोमस सिटम जैसी भविष्य की तकनीक में भारत में काफी काम कर रहा है। इस क्षेत्र में कंपनियां भारी निवेश भी कर रही हैं।

भारत का इस क्षेत्र में अमरीका के बाद दूसरा स्थान है।रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 35 प्रतिशत नियोक्ताओं का मानना है कि सेमीकंडक्टर्स और कम्प्यूटर तकनीकी अपनाने से उनके परिचालन में बदलाव आएगा। जबकि वैश्विक स्तर पर 20 प्रतिशत नियोक्ता ऐसा मानते हैं। वहीं 21 प्रतिशत नियोक्ताओं का मानना है कि क्वांटम और एनक्रिप्शन टैक्नोलाजी से भी उनके परिचालन में बदलाव होगा, जबकि वैश्विक स्तर पर 12 प्रतिशत नियोक्ता ऐसा मानते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि देश की अनुमानित सबसे तेज बढ़ते रोजगार में डेटा विशेषज्ञों, सुरक्षा प्रबंधन विशेषज्ञों, एआई और मशीन लर्निंग विशेषज्ञों की भूमिका वैश्विक बदलावों से नजदीक से जुड़ी हुई है। प्रतिभाओं की जरूरत पूरी करने के लिए भारत में काम करने वाली कंपनियां विविध प्रतिभा पूल में संभावनाएं (भारत में 67 प्रतिशत जबकि वैश्विक स्तर पर 47 प्रतिशत) तलाश रही हैं। साथ ही वे डिग्री की जरूरत छोडक़र कौशल आधारित नियुक्ति (भारत के स्तर पर 30 प्रतिशत जबकि वैश्विक स्तर पर 19 प्रतिशत है) पर जोर दे रही हैं।

एआई कौशल की मांग वैश्विक स्तर पर बढ़ी: रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई कौशल की मांग वैश्विक रूप से बढ़ी है। जिसमें भारत व अमरीका अग्रणी देश हैं। हालांकि मांग की वजह अलग हैं। अमरीका में प्राथमिक रूप से इसकी मांग व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं की ओर से है, जबकि भारत में जेन एआई ट्रेनिंग को बढ़ावा देने में कॉर्पोरेट स्पॉसरशिप की भूमिका काफी अहम है। इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बढ़ी डिजिटल पहुंच, भूराजनीतिक तनावों और जयवायु परिवर्तन का असर कम करने की कवायदें प्राथमिक बदलाव हैं, जो भारत में 2030 तक भविष्य के रोजगार में अहम भूमिका निभाने जा रही है।

स्किल्ड हैं युवा, लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में और सुधार जरूरी: मेटैओ क्वाक्वारेली एजुकेशन रिफॉर्म यानी शिक्षा के क्षेत्र में सुधार और तेजी से बदल रहीं तकनीक की स्किल्स को एडॉप्ट करने पर जोर दिया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत आज के समय में व्याप्त वैश्विक चुनौतियों के बावजूद एशिया प्रशांत क्षेत्र में वेंचर कैपिटल के लिए दूसरा सबसे बड़ा स्थान बना हुआ है। हालांकि क्यूएस रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत में एजुकेशन सिस्टम में और सुधार की आवश्यकता है।

– अमरीका में आज भी एच1वी वीजा में भारतीय लोगों को प्राथमिकता दी जाती है। अमरीकी सरकार भी मानती है कि भारतीय तकनीकी ज्ञान के बिना आज अमरीका भी अधूरा है। आज मैं भारत को नंबर दो नहीं बल्कि नंबर एक ही मानता हूं। जिस हिसाब से भारत में यूथ आगे आ रहा है व बढ़ रहा है। इस कारण भी भारत अभी नंबर एक है। इस चीज को मेंटेन रखने के लिए हम ज्यादा से ज्यादा रिसर्च और डवलपमेंट के सेंटर और स्किल डवलपमेंट की चीजों को बढ़ावा दें। सरकार भारत की तरक्की के लिए लगातार प्रयास कर रही है। साथ ही विपक्ष को भी सरकार के साथ कदम से कदम मिलाने होंगे, तभी देश तेजी से तरक्की करेगा। साथ ही देश में इंडस्ट्री को बढ़ावा देना होगा, तभी यूथ देश की प्रगति के लिए काम करेगा। साथ ही बाहर की ज्यादा से ज्यादा कंपनियों को देश में निवेश के आकर्षित करना होगा। इससे देश तेजी से आगे बढ़ेगा।
– नितिन अग्रवाल, सीईओ, राजस्थान सोलर एसोसिएशन

 

– टैलेंट के मामले में भारत दुनिया में सबसे आगे है। भारतीय टैलेंट को अमरीका ने भी माना है। पहले ट्रंप जब सत्ता में आए तो उन्होंने भारतीयों के लिए कई पाबंदियों की घोषणा की, लेकिन अब उन्होंने माना है कि अमरीका को भारतीय टैलेंट चाहिए। आज दुनियाभर में लेटेस्ट टेक्नोलॉजी को अपनाने वाले और बनाने वाले भारतीय ही हैं। तकनीकी में भारत अभी और आगे बढ़ेगा। जल्द ही भारत विश्व गुरु बनकर नंबर एक पर होगा। देश में मोदी सरकार आने के बाद स्किल डवलपमेंट पर चर्चा शुरू हुई है। इसमें हुनर पर बात की गई। इसी हुनर की बदौलत आज भारत तेजी से दुनिया में आगे बढ़ रहा है। जैसे-जैसे देश तकनीकी में आगे बढ़ेगा उससे उम्मीद है कि भारत 2030 तक पूरी दुनिया में नंबर एक पर होगा। बस इसमें यह ध्यान रखना होगा कि जो भारत का ब्रेन है, वह बाहर न जाए। इसके लिए चाहे सरकार को युवाओं को अच्छा पैकेज व सुविधा देनी पड़ें। ब्रेन डे्रन नहीं होना चाहिए ब्रेन गेन होना चाहिए।
– एन.के. जैन, अध्यक्ष, दी एम्प्लॉयर्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान

– भारत के पास सबसे बड़ी ताकत उसकी जनसंख्या है। इसी के दम पर भारत तकनीकी ज्ञान में पूरी दुनिया में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आज तक अमरीका में यूपीआई सिस्टम नहीं आ पाया, जबकि भारत में यह उपलब्ध है। चाहे सोलर हो, एआई हो, रोबोट तकनीकी हो या अन्य कोई कोई तकनीक। हम दुनिया के दूसरों देशों से इस वक्त बहुत आगे हैं। अभी अमरीका में ट्रंप सरकार आई है। वहां भी सरकार ने घोषणा की है कि वह भी एआई पर रिसर्च के लिए पैसा लगाएंगे। अगर भारतीय ब्रेन, जो विदेशों में काम कर रहा है। वह अगर देश के लिए ही कार्य करे और कायापलट होते देर नहीं लगेगी और भारत जल्द ही तकनीकि ज्ञान में दुनिया में नंबर एक होगा।
– पाराग बी व्यास, निदेशक, कोसोल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड, (ब्रांड नेम सनरे),

 

– भारत दुनियाभर में इस समय ब्रेन का भंडार है। भारत को इस ब्रेन को अपने देश के विकास में ही लगाना चाहिए। ब्रेन का पलायन रोकना चाहिए। अगर अपना टैलेंट अपने पास रहे तो भारत बहुत जल्द ही नंबर एक बन सकता है। अभी हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी कहा है कि जो भी इमीग्रेंट्स भारत आना चाहते हैं, उनका स्वागत है। भारत में भी स्कोप की कमी नहीं है। सरकार भी टैलेंट को सुविधाएं दे तो देश का विकास तेजी से होगा और भारत जल्द ही इस क्षेत्र में अग्रणी देश बन सकता है।
– डॉ. दिनेश गुप्ता, अध्यक्ष, शेखावाटी ग्रुप ऑफ कंपनीज, जयपुर और वाइस प्रेसिडेंट, गारमेंट एक्सपोर्ट एसोसिएशन

 

-कुंजेश कुमार पतसारिया



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