Business Remedies/नई दिल्ली। बढ़ते एनरोलमेंट और फीस में इजाफे के चलते भारत के एजुकेशनल संस्थानों की कुल इनकम FY26 और अगले वित्त वर्ष में 11–13 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद है। सोमवार को जारी क्रिसिल रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह सेक्टर के लिए लगातार पांचवां साल होगा जब डबल-डिजिट ग्रोथ दर्ज की जाएगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आय में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से नामांकन में सुधार और परिवारों द्वारा शिक्षा पर बढ़ते खर्च के कारण होगी। हालांकि, ऑपरेटिंग मार्जिन 27–28 प्रतिशत के दायरे में स्थिर रहने की संभावना है, क्योंकि संस्थानों को कर्मचारियों की सैलरी और अन्य संबंधित लागतों पर अधिक खर्च करना पड़ेगा। क्रिसिल रेटिंग्स ने बताया कि संस्थान क्षमता विस्तार और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार के लिए पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) करेंगे, लेकिन इसके बावजूद उनका क्रेडिट प्रोफाइल स्थिर बना रहना चाहिए। इसकी वजह मजबूत कैश फ्लो है, जो बाहरी कर्ज पर निर्भरता को सीमित करेगा।
करीब 26,000 करोड़ रुपये की कुल इनकम वाले 107 एजुकेशनल संस्थानों के विश्लेषण के आधार पर रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ते एनरोलमेंट के साथ संस्थान अतिरिक्त क्षमता निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन पर निवेश बढ़ाएंगे। इसके बावजूद, मजबूत ऑपरेटिंग कैश फ्लो उनकी फाइनेंशियल स्थिरता को बनाए रखेगा। सेगमेंट के लिहाज से, K-12 शिक्षा, जो कुल सेक्टर रेवेन्यू का लगभग एक तिहाई हिस्सा है, में 9–10 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है। यह शहरीकरण, बेहतर सामर्थ्य और सालाना फीस में बढ़ोतरी से समर्थित होगी।
वहीं, कला, विज्ञान, वाणिज्य और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में उच्च शिक्षा का एनरोलमेंट ग्रोथ 3–4 प्रतिशत पर मध्यम रहने का अनुमान है। इसके उलट, इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी से जुड़े कोर्स मजबूत इनकम ग्रोथ को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख कारक बने रहेंगे।
रिपोर्ट में कहा गया है,
“वैश्विक मंदी, जॉब मार्केट में अस्थिरता और अमेरिका में वीज़ा व इमिग्रेशन से जुड़े प्रतिबंधों के बावजूद इंजीनियरिंग कोर्सेज़ की मांग लगातार बनी हुई है, जिससे कुल इनकम में तेज़ वृद्धि देखने को मिली है।”
क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक हिमांक शर्मा ने कहा कि फीस में बढ़ोतरी का प्रमुख कारण उच्च मुद्रास्फीति, खासकर शहरी इलाकों में, है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कर्मचारियों की सैलरी और सुविधाओं पर बढ़ते खर्च के कारण ऑपरेटिंग मार्जिन में किसी खास सुधार की उम्मीद नहीं है।




