जयपुर/बीआर न्यूज नेटवर्क।
केंद्र सरकार ने शुक्रवार को 15 बड़े बैंकों को 1 अप्रैल से 31 मार्च, 2029 तक सोना और चांदी आयात करने की अनुमति दे दी है। इस सूची में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे प्रमुख बैंक शामिल हैं। वहीं, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और स्बरबैंक को इस अवधि में केवल सोना आयात करने की अनुमति दी गई है। यह अधिसूचना डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (डीजीएफटी) की ओर से जारी की गई है। सरकार का यह कदम बुलियन (सोना-चांदी) के आयात को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। केवल अधिकृत बैंकों के जरिए आयात करने से लेनदेन की निगरानी आसान होगी और अनियमितताओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
कौन-सी बैंकों को दी अनुमति
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से अधिकृत बैंकों में एक्सिस बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, डॉयचे बैंक, फेडरल बैंक, इंडसइंड बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, यस बैंक समेत कई अन्य बैंक शामिल हैं, जिन्हें सोना और चांदी, दोनों आयात करने की अनुमति दी गई है।
मार्च में सोने का आयात घटा
इस बीच, मार्च में भारत का सोने का आयात घटकर 9 महीने के निचले स्तर 3.1 अरब डॉलर पर आ गया। मात्रा के हिसाब से यह करीब 20-25 टन रहा, जो पिछले 12 महीनों के औसत 62 टन से काफी कम है। वल्र्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) के अनुसार, इसकी वजह मांग में कमी और मध्य पूर्व से सप्लाई में बाधाएं हैं, जो भारत के लिए एक अहम ट्रांजिट हब है। अप्रैल में सोने की कीमतों में कुछ सुधार देखने को मिला है। वहीं, इंपोर्ट में कमी और सप्लाई की दिक्कतों के कारण घरेलू बाजार में छूट भी कम हुई है।
फैसले से क्या फायदे होंगे?
आयात की सुचारू प्रक्रिया और स्थिर आपूर्ति: अधिकृत बैंकों के जरिए ही सोना-चांदी का आयात हो सकेगा, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी और नियंत्रित रहेगी। इससे बुलियन मार्केट में सप्लाई चेन मजबूत होगी और कस्टम्स पर सामान अटकने की समस्या कम होगी।
ज्वैलरी उद्योग को फायदा: भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का उपभोक्ता और सबसे बड़ा चांदी का आयातक है। ज्वैलरी निर्माताओं, बुलियन व्यापारियों और निर्यातकों को कच्चा माल आसानी से मिलेगा। इससे उत्पादन बढ़ेगा, रोजगार बनेगा और निर्यात में मदद मिलेगी।
बाजार में कीमतों पर नियंत्रण: आयात में रुकावट से प्रीमियम बढ़ जाता है। ज्यादा बैंकों को अनुमति देने से आपूर्ति बढ़ेगी, जिससे घरेलू बाजार में सोने-चांदी की कीमतें स्थिर रहेंगी या अनावश्यक उछाल कम होगी।
विदेशी मुद्रा प्रबंधन और व्यापार संतुलन: आरबीआई के नियंत्रण में आयात होने से करेंसी फ्लो बेहतर रहेगा। सरकार समय-समय पर लिस्ट अपडेट करके आयात को नियंत्रित कर सकती है, जिससे ट्रेड डेफिसिट पर असर कम पड़ेगा।
बैंकों को अतिरिक्त व्यवसाय: इन बैंकों को बुलियन ट्रेडिंग, फाइनेंसिंग और संबंधित सेवाओं से अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वसनीय चैनल विकसित होंगे।
समग्र अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव: ज्वैलरी सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, खासकर निर्यात और एमएसएमई के लिए। सुचारू आयात से इससे जुड़े लाखों लोगों को फायदा होगा।

