नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क
सरकार ने ड्राफ्ट नेशनल स्टील पॉलिसी 2047 जारी की है। इसके तहत भारत की क‘चे स्टील की उत्पादन क्षमता को मौजूदा लगभग 220 मिलियन टन से बढ़ाकर वर्ष 2047 तक 604 मिलियन टन करने का लक्ष्य रखा गया है। नीति में बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करने, क‘चे माल की उपलब्धता मजबूत करने, स्टील क्षेत्र के कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और तकनीकी बदलावों को गति देने के लिए विस्तृत रोडमैप पेश किया गया है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्टील उत्पादक और उपभोक्ता देश है। नई नीति में क्षमता विस्तार के साथ-साथ पर्यावरणीय लक्ष्यों, गुणवत्ता सुधार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भी जोर दिया गया है।
स्टील उत्पादन क्षमता में बड़ा विस्तार
ड्राफ्ट नीति के अनुसार, 2047 तक फिनिश्ड स्टील की मांग बढक़र 505 मिलियन टन होने का अनुमान है। इस दौरान प्रति व्यक्ति स्टील खपत &02 किलोग्राम तक पहुंच सकती है। उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी से स्टील निर्यात में भी 45 मिलियन टन की वृद्धि होने की संभावना है। सरकार का उद्देश्य घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ भारत की वैश्विक स्टील बाजार में स्थिति मजबूत करना है।
कार्बन उत्सर्जन घटाने पर विशेष जोर
स्टील क्षेत्र में औसत कार्बन उत्सर्जन तीव्रता को मौजूदा 2.54 टन कार्बन डाइऑक्साइड प्रति टन कू्रड स्टील से घटाकर 2047 तक 1.54 टन करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल, स्क्रैप आधारित स्टील उत्पादन, हाइड्रोजन आधारित तकनीकों और कार्बन कैप्चर तकनीक को बढ़ावा देने का प्रस्ताव है। यह रोडमैप भारत के 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य के अनुरूप है।
लौह अयस्क और कोकिंग कोल की आपूर्ति मजबूत होगी
लौह अयस्क की मांग 2025 के 299 मिलियन टन से बढक़र 2047 तक 772 मिलियन टन होने का अनुमान है। इसे देखते हुए विदेशी खदानों और संयुक्त उपक्रमों के माध्यम से उ‘च गुणवत्ता वाले लौह अयस्क भंडार सुरक्षित करने, घरेलू आपूर्ति बढ़ाने और परिवहन अवसंरचना मजबूत करने की योजना है। स्लरी पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार से लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाने और सडक़-रेल परिवहन पर निर्भरता कम करने पर भी जोर दिया गया है। वहीं, कोकिंग कोल की मांग 2&6 मिलियन टन तक पहुंचने का अनुमान है। भारत अपनी लगभग 92 प्रतिशत कोकिंग कोल जरूरत आयात से पूरी करता है। इसलिए घरेलू खनन, कोल वॉशरी के विस्तार, दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों और एआई आधारित बेहतर कोल ब्लेंडिंग को प्राथमिकता दी गई है।
वैल्यू-एडेड स्टील और डिजिटल तकनीक को बढ़ावा
नीति में स्टेनलेस स्टील और स्पेशियलिटी स्टील जैसे वैल्यू-एडेड उत्पादों के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि आयातित तकनीक और क‘चे माल पर निर्भरता कम हो। मैंगनीज, चूना पत्थर और अन्य महत्वपूर्ण क‘चे माल की दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित करने की रणनीति भी प्रस्तावित है। इसके साथ भारतीय मानकों और गुणवत्ता मूल्यांकन तंत्र को मजबूत बनाने, डिजिटल अवसंरचना, साझा डेटा मानकों, इंडस्ट्री 4.0, विश्वसनीय एआई और स्वचालित उत्पादन प्रणालियों को बढ़ावा देने की योजना है। सरकार के अनुसार, क‘चे माल के स्रोतों में विविधता, स्टील व्यापार और तकनीकी सहयोग बढ़ाने में अंतरराष्ट्रीय साझेदारी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

