बिजनेस रेमेडीज/नई दिल्ली। भारत का मत्स्य पालन क्षेत्र तेजी से देश की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बनता जा रहा है। केंद्र सरकार के अनुसार, बीते एक दशक में इस सेक्टर में बड़े निवेश, उत्पादन में वृद्धि और निर्यात के विस्तार ने इसे खाद्य सुरक्षा, रोजगार और विदेशी आय का अहम स्रोत बना दिया है। ग्रामीण और तटीय क्षेत्रों में यह सेक्टर आर्थिक सशक्तिकरण का प्रमुख माध्यम बनकर उभरा है। साथ ही, सरकार की योजनाओं और नीतिगत सुधारों ने इस क्षेत्र को नई दिशा दी है।
निवेश और रोजगार में बड़ा विस्तार
साल 2015 से अब तक मत्स्य पालन क्षेत्र में कुल 39,272 करोड़ रुपए का निवेश किया गया है। इससे प्राथमिक स्तर पर करीब 3 करोड़ मछुआरों और मछली पालकों को रोजगार मिला है, जबकि पूरी वैल्यू चेन में यह संख्या लगभग दोगुनी हो जाती है। कोल्ड-चेन, आधुनिक मछली पकडऩे के बंदरगाह और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार से सेक्टर को नई गति मिली है, जिससे ग्रामीण आय में भी वृद्धि दर्ज की गई है। डिजिटल ट्रेसबिलिटी सिस्टम और सैनिटरी इम्पोर्ट परमिट को ऑनलाइन करने से कारोबार आसान हुआ है और मंजूरी का समय घटकर 72 घंटे रह गया है।
उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि
देश में मछली उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। 2019-20 में 141.64 लाख टन उत्पादन था, जो 2024-25 में बढक़र 197.75 लाख टन हो गया है। यह औसतन करीब 7 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि को दर्शाता है। भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एक्वाकल्चर उत्पादक बन चुका है और वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी करीब 8 प्रतिशत है। सरकार ट्यूना, सीबास, कोबिया, मड क्रैब और सीवीड जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों को बढ़ावा देकर उत्पादन में विविधता भी ला रही है।
निर्यात में दोगुनी छलांग
समुद्री उत्पादों का निर्यात पिछले दशक में दोगुना से अधिक बढक़र 62,408 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जिसमें झींगा निर्यात का सबसे बड़ा योगदान रहा। भारत अब 130 से ज्यादा देशों में 350 से अधिक समुद्री उत्पाद निर्यात कर रहा है। कुल निर्यात का 36.42 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका को जाता है, जबकि चीन, यूरोपीय संघ, जापान और मध्य पूर्व भी प्रमुख बाजार हैं। वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी 2.5 प्रतिशत से बढक़र 11 प्रतिशत हो गई है, जिससे निर्यात की गुणवत्ता और आय दोनों में सुधार हुआ है।
मत्स्य पालन क्षेत्र में बढ़ता निवेश, उत्पादन और निर्यात यह संकेत देते हैं कि भारत वैश्विक समुद्री बाजार में तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। सरकार की योजनाएं, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और नए बाजारों में विस्तार इस सेक्टर को आने वाले वर्षों में और अधिक ऊंचाई पर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

