हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाएगा। यह दिन महिलाओं के संघर्ष, उपलब्धियों, और समान अधिकारों के लिए उनके संघर्ष को सम्मानित करने के रूप में मनाया जाता रहा है। यह दिन न सिर्फ महिलाओं की महत्ता को पहचानता है, बल्कि उनके अधिकारों, सशक्तिकरण और उनके योगदान को मान्यता देने का भी अवसर है। महिला दिवस की शुरुआत किसी एक दिन या एक घटना से नहीं हुई, बल्कि यह दशकों के श्रम आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों का परिणाम है। इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का विषय दान से लाभ है। यह विषय पारस्परिक सहयोग और समर्थन की शक्ति को रेखांकित करता है। दान देने के कई रूप हो सकते हैं, जिनमें दान, ज्ञान, संसाधन, अवसंरचना, दृश्यता, समर्थन, आवाज, शिक्षा, प्रशिक्षण, मार्गदर्शन, समान वेतन, न्याय, अवसर, सुरक्षा या समय शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की उत्पत्ति 20वीं शताब्दी के आरंभ में यूरोप और उत्तरी अमेरिका में उभरे श्रमिक आंदोलनों से जुड़ी है। महिला दिवस के पहले समारोहों में से एक 28 फरवरी 1909 को न्यूयॉर्क शहर में आयोजित किया गया था, जिसे सोशलिस्ट पार्टी ऑफ अमेरिका की ओर से मनाया गया था। पहला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 19 मार्च 1911 को ऑस्ट्रिया-हंगरी, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्जरलैंड में दस लाख से अधिक लोगों की ओर से मनाया गया था। कार्यस्थल पर लैंगिक भेदभाव और महिलाओं के मताधिकार जैसी अवधारणाओं के महत्व बढऩे के साथ रूस ने पहली बार 1913 में फरवरी के अंत में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया। जर्मनी में पहली बार 8 मार्च,1914 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया।

