पिछले काफी दिनों से कमोडिटी बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। जहां गत कुछ सप्ताह से रॉकेट की रफ्तार से भाग रही चांदी में अचानक गत दिनों भारी गिरावट देखने में आई है। रिकॉर्ड हाई से लुढक़कर सोने-चांदी ने निवेशकों को चौंका दिया। चांदी ने अचानक निवेशकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि मुनाफावसूली और डॉलर में मजबूती इस गिरावट की मुख्य वजह रही है। सोने के भाव में भी दबाव बना रहा। एक दिन में चांदी में भारी गिरावट आई है। इस गिरावट से निवेशकों को बड़ा नुकसान हुआ है, खासकर जो हाल ही में चांदी में निवेश कर चुके हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट उन लोगों के लिए एक अवसर हो सकती है, जो लंबे समय से निवेश का इंतजार कर रहे थे, लेकिन बाजार की
स्थिरता की जांच करना अनिवार्य है। आने वाले समय में चांदी की कीमतों में और गिरावट की संभावना देखने को मिल सकती है, यह अनुमान भी लगाया जा रहा है कि चांदी 60 फीसदी तक क्रैश हो सकती है। इसलिए निवेशकों को सावधानी बरतने और बाजार की चाल को समझने की सलाह भी दी जा रही है। भारत में चांदी की कीमतों में हालिया 15 वर्षों की सबसे बड़ी गिरावट ने ऊंचे भाव पर खरीदारी करने वाले निवेशकों को भारी नुकसान पहुंचाया है। यह गिरावट डॉलर की मजबूती, मुनाफावसूली और कमजोर औद्योगिक मांग के कारण हुई है। आने वाले समय में औद्योगिक मांग में अनिश्चितता और भू-राजनीतिक कारकों के चलते चांदी में भारी अस्थिरता रहने की उम्मीद है। मार्केट विश्लेषकों ने इस गिरावट की तुलना 1980 के सिल्वर थर्सडे से की है, जिसने उस दौर की ग्लोबल अर्थव्यवस्था को हिला दिया था। उस समय चांदी के असामान्य उछाल और अचानक गिरावट के पीछे अमेरिका के अरबपति हर्बर्ट और बंकर हंट का हाथ था। वर्ष,1970 के दशक की शुरुआत में जब अमेरिकी डॉलर का गोल्ड स्टैंडर्ड खत्म हुआ, महंगाई और आर्थिक अस्थिरता बढ़ गई। इस बीच हंट भाइयों ने चांदी को ‘सुरक्षित निवेश’ मानकर बड़े पैमाने पर खरीदना शुरू किया।

