Friday, January 9, 2026 |
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प्रगति प्लेटफॉर्म से रुकी परियोजनाओं को मिली गति

by Business Remedies
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प्रो-एक्टिव गवर्नेंस ऐंड टाइमली इंप्लीमेंटेशन (प्रगति) प्लेटफॉर्म ने परियोजना निगरानी, अंतर-मंत्रालयी और केंद्र-राज्य समन्वय, तथा मुद्दों के समाधान को डिजिटल रूप से एकीकृत करके रुकी हुई अधोसंरचना परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद की है। प्रगति की समीक्षा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली एक बैठक में पिछले सप्ताह की गई। वर्ष 2015 से अब तक प्रगति ने 85 लाख करोड़ रुपये मूल्य की 3,300 विलंबित परियोजनाओं की मदद की है। यह बात मायने रखती है क्योंकि सार्वजनिक अधोसंरचना में देरी की काफी ऊंची आर्थिक लागत चुकानी पड़ती है।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के नवंबर 2025 के आंकड़े दिखाते हैं कि केंद्र सरकार की फंडिंग वाली परियोजनाओं की लागत तयशुदा सीमा से 22.2 फीसदी तक बढ़ चुकी है।
इससे संशोधित लागत में करीब 29.55 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है जबकि 823 चल रही परियोजनाओं में विशुद्ध रूप से 5.37 लाख करोड़ रुपये अतिरिक्त लगे। यह अतिरिक्त व्यय केवल लेखा संबंधी दिक्कतें नहीं पैदा करता। इससे सार्वजनिक पूंजी बाधित होती है, आर्थिक लाभ टलते हैं और उस विकास प्रभाव को कमजोर करते हैं जिसे अधोसंरचना खर्च से प्राप्त किया जाना चाहिए। इन विलंब के कारण अच्छी तरह से ज्ञात हैं और मुख्यत: संरचनात्मक हैं। इनमें से अधिकांश भूमि अधिग्रहण से उत्पन्न होते हैं, जो अकेले ही लगभग 35 फीसदी परियोजना विलंबों के लिए जिम्मेदार हैं।
इसके बाद पर्यावरणीय स्वीकृतियों का हिस्सा लगभग 20 फीसदी है। जमीन के अधिकार संबंधी मुद्दे, उपयोगिताओं का स्थानांतरण और अंतर-मंत्रालयीन विवाद समस्या को और बढ़ाते हैं। मूल रूप से, ये केंद्र और राज्यों के बीच, मंत्रालयों के बीच, तथा नियामकों और क्रियान्वयन एजेंसियों के बीच समन्वय की विफलताएं हैं।
प्रगति ने यह दिखाया है कि इन विफलताओं में से कुछ को सतत निगरानी के माध्यम से दूर किया जा सकता है। इसकी ताकत वास्तविक समय के आंकड़ों, ड्रोन से ली गई तस्वीरों और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को संयोजित करने में निहित है। इससे निगरानी, समन्वय और समस्या-समाधान को बढ़ावा मिलता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह प्लेटफॉर्म एक स्वतंत्र समीक्षा तंत्र के रूप में कार्य नहीं करता रहा है।



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