प्रकृति की रक्षा के लिए जागरूकता बढ़ाना और दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे विभिन्न पर्यावरणीय मुद्दों को लेकर आज दुनिया के विभिन्न देशों में पर्यावरण दिवस मनाया जाएगा। 5 जून,1973 को पहला विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। आज भारत ही नहीं पूरा विश्व पर्यावरण प्रदूषण की समस्या से जूझ रहा है। वर्तमान समय में पानी, हवा, रेत मिट्टी आदि के साथ-साथ पेड़ पौधे, खेती और जीव जंतु आदि सभी पर्यावरण प्रदूषण से प्रभावित हो रहे हैं। कारखाने से निकलने वाले अपशिष्टों, परमाणु संयंत्रों से बढऩे वाली रेडियोधर्मिता, मल के निकास आदि कई सारे कारणों से लगातार पर्यावरण प्रदूषित होता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन प्रदूषण रोकने के लिए अनेक उपाय लगातार कर रहा है। औद्योगीकरण और शहरीकरण के कारण हरे भरे खेत, भूमि का जलवायु, वन्य जीव का स्वास्थ्य, भूस्खलन आदि प्रभावित हो रहे हैं। इसी को मद्देनजर रखते हुए बड़े उद्योगों को प्रदूषण रोकने के उपाय अपनाने के लिए कहा जा रहा है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जा रहे हैं और ज्यादा से ज्यादा वृक्षारोपण कार्यक्रम में ध्यान दिया जा रहा है यह सब प्रयास पर्यावरण को संतुलित और सुरक्षित रखने के लिए नियंत्रण किए जा रहे हैं। यह दिवस सार्वजनिक आउटरीच के लिए एक वैश्विक मंच है, जिसमें सालाना 143 से अधिक देशों की भागीदारी होती है। इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करने पर केंद्रित होगा। कोरिया गणराज्य वैश्विक समारोह की मेजबानी करेगा। दशकों से प्लास्टिक प्रदूषण दुनिया के हर कोने में फैल चुका है, यह हमारे पीने के पानी, हमारे खाने और शरीर में समा रहा है। जो स्वास्थ्य पर विपरित प्रभाव डाल रहा है। अगर भारत प्लास्टिक मुक्त हो जाए तो निश्चित रूप से बिगड़ते वातावरण में शुद्धता का समावेश हो सकेगा। इस दिन सभी को पर्यावरण को सुधारने के लिए संकल्प लेकर आगे बढऩा चाहिए।

