Sunday, August 9, 2026 |
Home Breaking Newsविकसित भारत : कठिन परिश्रम से ही लक्ष्य हासिल होगा

विकसित भारत : कठिन परिश्रम से ही लक्ष्य हासिल होगा

by Business Remedies
0 comments
  • अगले 22 वर्षों में लगातार 7.8 प्रतिशत वृद्धि की दरकार
  • विश्व बैंक ने कहा, 2047 तक लगातार उच्च आय की स्थिति रखनी होगी

बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। विकसित भारत का सपना कड़े परिश्रम व मेहनत से ही हासिल होगा। वर्ष 2047 तक भारत को अपनी वृद्धि दर को लगातार उच्च आय पर रखना होगा, तभी भारत का सपना साकार हो सकेगा। भारत को अगले 22 वर्षों में औसतन 7.8 प्रतिशत वृद्धि की आवश्यकता होगी। हाल ही विश्व बैंक ने इस संबंध में एक रिपोर्ट भी जारी की है। विश्व बैंक ने ‘एक पीढ़ी में उच्च आय वाली अर्थव्यवस्था बनना’ शीर्षक से जारी अपनी रिपोर्ट में बताया है कि यह लक्ष्य संभव है।

2000 से 2024 के बीच भारत की औसत वृद्धि की तेज गति को देखते हुए यदि वित्त वर्ष 2021 और वित्त वर्ष 2022 को छोड़ दें तो यह 6.6 प्रतिशत है, जो कोविड की मंदी और तत्काल वापसी से प्रभावित था। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की पिछली उपलब्धियां इसकी भविष्य की महत्वाकांक्षाओं के लिए आधार प्रदान करती हैं। हालांकि, वहां पहुंचने के लिए सुधारों और उनके कार्यान्वयन को लक्ष्य जितना ही महत्वाकांक्षी होना चाहिए।

चिली, कोरिया और पोलैंड से लेना होगा सबक
विश्व बैंक के कंट्री डायरेक्टर ऑगस्टे तानो कौमे ने कहा, चिली, कोरिया और पोलैंड जैसे देशों से यह सीखना होगा कि कैसे उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपने एकीकरण को गहरा करके मध्यम-से-उच्च आय वाले देशों में सफलतापूर्वक बदलाव किया है। भारत सुधारों की गति को बढ़ाकर और अपनी पिछली उपलब्धियों पर निर्माण करके अपना रास्ता खुद बना सकता है।

विकास पथ के लिए तीन परिदृश्यों का करना होगा मूल्यांकन
रिपोर्ट में अगले 22 वर्षों में भारत के विकास पथ के लिए तीन परिदृश्यों का मूल्यांकन किया गया है। वह परिदृश्य जो भारत को एक पीढ़ी में उच्च आय की स्थिति तक पहुंचने में सक्षम बनाता है, के लिए आवश्यक है कि राज्यों में तेज और समावेशी विकास प्राप्त किया जाए। 2035 तक सकल घरेलू उत्पाद के वर्तमान 33.5 प्रतिशत से 40 प्रतिशत (दोनों वास्तविक शर्तों में) तक कुल निवेश बढ़ाया जाए, समग्र श्रम शक्ति भागीदारी को 56.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 65 प्रतिशत से ऊपर किया जाए और समग्र उत्पादकता वृद्धि में तेजी लाई जाए।

बीते तीन वित्तीय वर्षों में औसत वृद्धि दर को बढ़ाया
रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में भारत ने अपनी औसत वृद्धि दर को 7.2 प्रतिशत तक बढ़ाया है। इस गति को बनाए रखने और दो दशकों में 7.8 प्रतिशत की औसत वृद्धि दर प्राप्त करने के लिए भारत को आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर काम करना होगा। निजी और सार्वजनिक निवेश दीर्घकालिक विकास के लिए वास्तविक होगा। रिपोर्ट में वित्तीय क्षेत्र के विनियमन को मजबूत करने, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए औपचारिक ऋण की बाधाओं को हटाने और प्रत्यक्ष विदेशी से संबंधित निवेश नीतियों को सरल बनया जा सके।

– विकसित बनने के लिए भारत को लगातार संरचनात्मक परिवर्तन, व्यापार भागीदारी और प्रौद्योगिकी अपनाने को बढ़ावा देना होगा। वर्तमान में रोजगार में कृषि की हिस्सेदारी 45 प्रतिशत है। बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, आधुनिक तकनीक को अपनाना, श्रम बाजार के नियमों को सुव्यवस्थित करना और फर्मों पर अनुपालन बोझ को कम करना उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा को और बढ़ाएगा। ये कदम भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखला भागीदारी दरों में थाईलैंड, वियतनाम और चीन जैसे देशों की बराबरी करने में मदद करेंगे।
– गिरधारी लाल खंडेलवाल, मुख्य सचिव, फोर्टी

– इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र व राज्य सरकारें अधिक से अधिक मिलकर काम करें। साथ ही यह कोशिश करें कि भारत का माल ज्यादा से ज्यादा एक्सपोर्ट हो। साथ ही भारत में जो विदेशी माल आकर भारत की इंडस्ट्री को खराब कर रहा है, उस पर ज्यादा इंपोर्ट ड्यूटी लगातार उसे कम किया जा सके, जिससे भारत की इंडस्ट्री चले। माल ज्यादा एक्सपोर्ट होगा तो भारत की जीडीपी भी बढ़ेगी। साथ ही मेक इन इंडिया को भी ताकत देनी होगी, जिससे देश की आर्थिक वृद्धि दर तेजी से बढ़े। साथ ही बाहर की कंपनियां भी यहां आकर प्रोडक्शन करें, इससे देश की जीडीपी में जबर्दस्त इजाफा होगा। साथ ही जो आईटी कंपनियां पैसे को विदेश ले जा रही हैं, उसे रोकना होगा।
– जगदीश सोमानी, अध्यक्ष, विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र, जयपुर

– अभी भारत की जीडीपी 6 प्रतिशत से ऊपर चल रही है। अभी भारत में अमृत महोत्सव चल रहा है। अगर भारत को विकसित होना है तो जीडीपी को 7 प्लस करना ही होगा। तभी भारत 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को छू पाएगा। अभी भारत 5 ट्रिलियन इकोनॉमी और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का जो सपना देख रहा है, उसे कड़े परिश्रम और मेहनत से ही हासिल किया जा सकेगा। इसलिए भारत को अपनी जीडीपी बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए।
– डॉ. अरुण अग्रवाल, महासचिव, राजस्थान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज



You may also like

Leave a Comment