- अब आज डीटीओ कार्यालयों का करेंगे घेराव
- सरकार ने पुराने वाहनों की बिक्री पर 12.5 से 25 प्रतिशत कर दिया रजिस्ट्रेशन चार्ज
- डीलर्स का कहना, सरकार इस निर्णय को वापस ले
- अब आगे की रणनीति की जा रही तैयार
बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। प्रदेश में पुरानी कारें बेचने वाले डीलरों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कार डीलर्स की ओर से अब आज सभी जिलों में डीटीओ कार्यालयों का घेराव किया जाएगा। इससे पहले जयपुर में कलक्ट्रेट पर कार डीलर्स ने विरोध प्रदर्शन किया। ऑल राजस्थान वाहन व्यापार संगठन की ओर से सीएस सुधांश पंत को ज्ञापन देते हुए कहा कि पहले दिल्ली से खरीदी 2014 मॉडल की कार का राजस्थान में रजिस्ट्रेशन करवाने पर 23 से 25 हजार रुपए खर्च आता था, लेकिन अब यह खर्च बढ़ कर 94 से एक लाख हजार हो गया है। जबकि व्यापारी एक गाड़ी पर 10 से 20 हजार का ही धंधा करता था, लेकिन यह राशि भरना मुश्किल हो गया है। सरकार ने यह निर्णय वापस नहीं लिया तो बाजार का बर्बाद होना तय है। यही कारण है कि प्रदेश स्तर पर आंदोलन चल रहा है। जल्द ही सभी डीटीओ कार्यालय को घेराव किया जाएगा।
सरकार ने ऐसे बढय़ा शुल्क: राजस्थान में सैकंड हैंड कार अन्य राज्यों से लाने पर उसके रजिस्ट्रेशन में 15 साल पूरे होने में बचे वर्ष के अनुरूप हर साल के लिए 10 प्रतिशत शुल्क की छूट मिलती थी, जो अधिकतम 80 प्रतिशत तक होती थी। इसके चलते ज्यादातर लोग दिल्ली-एनसीआर से 2014 से 2016 मॉडल की गाड़ी खरीदते थे। इसका रजिस्ट्रेशन शुल्क 25 से 30 हजार आता था, लेकिन अब सरकार ने इसमें बदलाव कर दिया। यह छूट पांच फीसदी कर दी है। वह भी अधिकतम पांच साल के लिए यानि कि रजिस्ट्रेशन शुल्क दोगुना से ज्यादा देना पड़ेगा, जबकि दिल्ली व हरियाणा में एक हजार से पांच हजार रुपए ही शुल्क है।
बसों का रजिस्ट्रेशन लगातार घट रहा: प्रदेश में परिवहन विभाग की सर्वाधिक आय कैरिज बसों के रजिस्ट्रेशन से होती थी, लेकिन पिछले एक दशक में प्रदेश की सरकारों ने लगातार यह रजिस्ट्रेशन महंगा किया। दूसरी ओर केंद्रीय परिवहन विभाग (ऑल इंडिया परमिट) इससे सस्ता मिलने लगा। यही कारण है कि राजस्थान में चलने वाली ज्यादातर निजी ट्रेवल बसें नॉर्थ-ईस्ट में रजिस्टर्ड हैं, जहां पर कंपनियों ने अपने कार्यालय खोल लिए। उसके बाद ऑल इंडिया परमिट से राजस्थान में चल रही हैं। इसका सीधा नुकसान राज्य सरकार को उठाना पड़ रहा है।
मोटरसाइकिल भी रिन्यू करवाना महंगा: अगर आपका दोपहिया वाहन 15 साल पुराना हो गया है तो उसे रिन्यू करवाना महंगा होता है। राजस्थान में वह भी इतना महंगा है कि 15 साल बाद उसकी जितनी कीमत होती है, उससे दो गुना ज्यादा टैक्स भरना पड़ता है। जैसे 15 साल होने पर एक बाइक की कीमत लगभग 9 हजार रुपए रह जाती है, तो उसका नवीनीकरण करवाने के लिए परिवहन विभाग को 14 हजार रुपए देने होंगे। अन्यथा आपका चालान हो सकता है।
नए वाहन का रजिस्ट्रेशन महंगा: 10 जुलाई से प्रदेश में दोपहिया वाहनों पर दो फीसदी टैक्स बढ़ा है। इनमें 200 सीसी के दोपहिया वाहन पर छह की जगह 8, 200 से 500 सीसी पर 13 और 500 से ज्यादा सीसी इंजन के वाहन पर 15 प्रतिशत वन टाइम टैक्स लागू किया गया है। इसी तरह से अन्य वाहनों के वन टाइम टैक्स में बढ़ोतरी हुई है।
रजिस्ट्रेशन चार्ज दोगुना, इसलिए विरोध: गौरतलब है कि राजस्थान सरकार ने फरवरी में जो लेखानुदान पेश किया उसमें प्रदेश के वाहनों की दोबारा बिक्री करने पर लगने वाला शुल्क 12.5 प्रतिशत से 25 प्रतिशत किया था। वहीं, 10 जुलाई को पूर्ण बजट में नए वाहनों का रजिस्ट्रेशन दो फीसदी बढ़ाया। इसके अलावा अन्य राज्यों से खरीदे वाहन को राजस्थान में अपने नाम करवाने पर लगने वाले शुल्क में बदलाव किया और छूट हटाई। आलम यह है कि प्रदेश में सैकंड हैंड कारों का काम करने वाले हजारों व्यवसायियों की सांसें अटक गई हैं, क्योंकि सरकार ने अचानक दरें बढ़ाई। इसके चलते उनके पास हजारों की संख्या में खड़े वाहनों की कीमतें बढ़ गईं। इन गाडिय़ों को बेचना भारी पड़ेगा। यही कारण है कि पूरे प्रदेश में लगातार सरकार के निर्णय के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं।

रजत छाबड़ा
10 जुलाई को राजस्थान का जो बजट आया है। उस बजट में सरकार ने पुराने वाहन बेचने वाले डीलर्स के साथ अन्याय किया है। पहले ट्रांसफर का जो साढ़े 12 प्रतिशत टैक्स लगता है उसे बढ़ाकर अब 25 प्रतिशत कर दिया। मतलब टैक्स जस्ट डबल हो गया। अब जो अन्य राज्यों से जो गाडिय़ां आ रही थी, जिनका राजस्थान में दोबारा पंजीकरण होता है। उस पर 10 प्रतिशत की रिवेट मिलती थी। यह रिवेट लगरतार आठ साल तक मिलता था। सरकार ने 2016 को वेस बनाया हुआ था। इस तरह आठ साल में 80 प्रतिशत की छूट मिल जाती थी। अब सरकार ने इसे पांच प्रतिशत करके समय सीमा को पांच कर दिया। उदाहरण के लिए जो गाड़ी पहले 25 हजार रुपए में रजिस्टर्ड हो जाती थी। वह अब 94 हजार से एक लाख रुपए में रजिस्र्ड होगी। इसी के विरोध में पूरे राजस्थान में आंदोलन हो रहा है।
– रजत छाबड़ा, प्रदेश अध्यक्ष, ऑल राजस्थान वाहन व्यापार संगठन

