Business Remedies/नई दिल्ली (IANS)। देश के प्रमुख उद्योग संगठन CII ने वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट के लिए अपने सुझावों में केंद्र सरकार से सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के निजीकरण की प्रक्रिया को तेज करने की अपील की है। संगठन का कहना है कि इससे सरकारी कंपनियों की वास्तविक कीमत सामने आएगी और सरकार को संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी।
CII के महानिदेशक Chandrajit Banerjee ने कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति में अब निजी कंपनियों और नए विचारों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप एक दूरदर्शी निजीकरण नीति से सरकार अपने मुख्य कार्यों पर ध्यान दे सकेगी और private sector को उद्योगों के विकास और employment generation में तेजी लाने का मौका मिलेगा।
इसी सोच के तहत CII ने सरकार की strategic disinvestment policy को तेजी से लागू करने की मांग की है, जिसके अनुसार, non-strategic sectors में सभी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों से सरकार बाहर निकले और strategic sectors में भी सरकार की हिस्सेदारी बहुत कम रखी जाए।
निजीकरण को तेज करने के लिए चार सूत्रीय रणनीति
निजीकरण की प्रक्रिया को मजबूत और तेज करने के लिए CII ने चार सूत्रीय व्यापक रणनीति की रूपरेखा तैयार की है।
पहले सुझाव में कहा गया है कि निजीकरण के लिए कंपनियों का चयन demand-based approach पर किया जाना चाहिए। अभी सरकार पहले कंपनियों को बेचने के लिए चुनती है और बाद में investors की रुचि देखती है। कई बार निवेशकों की दिलचस्पी या सही valuation न मिलने पर प्रक्रिया रुक जाती है। संगठन का कहना है कि पहले investors की interest जानी जाए और फिर उन्हीं कंपनियों को प्राथमिकता दी जाए जिनमें अच्छी demand हो। इससे प्रक्रिया आसान होगी और बेहतर pricing मिल सकेगी।
दूसरे सुझाव में कहा गया है कि निवेशकों को स्पष्ट जानकारी देने के लिए सरकार को तीन साल की privatization plan पहले से घोषित करनी चाहिए। इससे investors को तैयारी का समय मिलेगा और कंपनियों की सही valuation तय करने में मदद मिलेगी।
तीसरे सुझाव के तहत CII ने एक मजबूत institutional framework बनाने की बात कही है ताकि निजीकरण की निगरानी और भरोसे को बढ़ाया जा सके। इसके लिए एक विशेष संस्था बनाने का सुझाव दिया गया है, जिसमें policy direction के लिए minister-level board, सलाह देने के लिए industry और legal experts का advisory board और काम को आगे बढ़ाने के लिए एक professional team शामिल हो।
चरणबद्ध विनिवेश से जुट सकते हैं 10 लाख करोड़ रुपये
इसके अलावा, संगठन ने एक अस्थायी उपाय के रूप में phased disinvestment और तीन साल की योजना की सिफारिश की है, जिसके तहत सरकार listed public sector enterprises (PSEs) में अपनी हिस्सेदारी धीरे-धीरे घटाकर पहले 51 प्रतिशत तक ला सकती है। इससे सरकार largest shareholder बनी रहेगी और market valuation भी बेहतर होगी। बाद में इस हिस्सेदारी को और घटाकर 33 से 26 प्रतिशत तक लाया जा सकता है।
CII के अनुसार, अगर सरकार 78 listed public sector companies में अपनी हिस्सेदारी 51 प्रतिशत तक घटाती है, तो करीब 10 लाख करोड़ रुपये की राशि जुटाई जा सकती है। योजना के पहले दो वर्षों में 55 ऐसी कंपनियों में disinvestment किया जा सकता है, जिनमें सरकार की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत या उससे कम है, जिससे लगभग 4.6 लाख करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं। इसके बाद 23 ऐसी कंपनियों में विनिवेश किया जा सकता है, जिनमें सरकार की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत से ज्यादा है, जिससे करीब 5.4 लाख करोड़ रुपये जुटाए जाने की संभावना है।
संगठन का कहना है कि इन कदमों से investors confidence बढ़ेगा, प्रक्रिया transparent होगी और सरकार को higher valuation मिलेगा। निजीकरण से सरकार health, education और green infrastructure जैसे जरूरी क्षेत्रों में ज्यादा निवेश कर सकेगी, जबकि strategic sectors में सीमित मौजूदगी बनाए रखते हुए देश को self-reliant और global level पर मजबूत बनाया जा सकेगा।

