मुंबई,
देश के प्रमुख शेयर बाजार BSE और NSE ने घोषणा की है कि Union Budget 2026-27 के दिन 1 February को नियमित ट्रेडिंग सत्र आयोजित किया जाएगा, जबकि यह दिन रविवार है। Stock Market Update के अनुसार, बजट प्रस्तुति के महत्व को देखते हुए बाजार सामान्य समय पर ही खुलेंगे। ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो 1 February को बजट पेश किए जाने की परंपरा रही है और जब भी यह date सप्ताहांत पर पड़ी है, तब भी बाजार विशेष सत्र के तहत खुले हैं। इस वर्ष भी वही व्यवस्था लागू रहेगी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 February को सुबह 11 बजे लोकसभा में Union Budget 2026-27 प्रस्तुत करेंगी। यह उनका लगातार नौवां बजट होगा, जो किसी भी वित्त मंत्री के लिए लंबी निरंतर अवधि में शामिल है। वर्ष 2024 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की तीसरी बार सत्ता में वापसी के बाद यह दूसरा पूर्ण बजट होगा। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने अपने परिपत्र में कहा है कि बजट प्रस्तुति के कारण 1 February 2026 को सुबह 9:15 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक सामान्य बाजार समय के अनुसार लाइव ट्रेडिंग सत्र संचालित किया जाएगा।
हालांकि, यह दिन निपटान अवकाश के रूप में भी रहेगा। इसका अर्थ है कि 30 January को खरीदे गए शेयर 1 February को बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं होंगे। इसी प्रकार बजट Day पर खरीदे गए शेयरों को अगले दिन बेचा नहीं जा सकेगा। विश्लेषकों का मानना है कि निवेशकों की नजर इस बार सरकार के ऋण मानकों, राजकोषीय घाटे के आंकड़ों और आगामी वर्ष के लिए निर्धारित उधारी कार्यक्रम पर रहेगी। रिपोर्ट के अनुसार, अगले वित्त वर्ष में उधारी में लगभग 3 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि संभव है। इससे FY27 में सकल घरेलू उत्पाद के मुकाबले राजकोषीय घाटा लगभग 4.1 से 4.2 प्रतिशत के दायरे में रह सकता है, जो राजकोषीय संतुलन की मौजूदा दिशा के अनुरूप है।
आर्थिक मामलों का विभाग बजट दस्तावेजों की तैयारी का नेतृत्व करता है। इन दस्तावेजों में आगामी वित्त वर्ष के लिए सरकारी व्यय, राजस्व अनुमान और नई योजनाओं का विस्तृत ब्योरा दिया जाएगा। इससे पहले 29 January को Economic Survey 2025-26 संसद में पेश किया गया था। इसके बाद मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन और वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रेस वार्ता कर अर्थव्यवस्था की स्थिति और संभावनाओं पर जानकारी दी। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि बजट Day पर nifty और sensex में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है, क्योंकि निवेशक कर ढांचे, पूंजीगत व्यय और राजकोषीय अनुशासन से जुड़े प्रावधानों पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं।

