New Delhi,
चालू वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से जनवरी अवधि के दौरान भारत से इंजीनियरिंग सामानों का निर्यात 4.52 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के साथ 101.13 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। पहली बार किसी वित्त वर्ष के पहले 10 महीनों में निर्यात 100 अरब डॉलर के स्तर को पार कर गया है। यह जानकारी इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन परिषद इंडिया के अध्यक्ष पंकज चड्ढा ने दी।
जनवरी माह में इंजीनियरिंग निर्यात में 10.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह 10.40 अरब डॉलर रहा। इस बढ़त में तांबा, लोहा और इस्पात तथा मोटर वाहन क्षेत्र की प्रमुख भूमिका रही। हालांकि इस अवधि में अमेरिका को होने वाले निर्यात में गिरावट देखी गई। अमेरिका, जो भारत के इंजीनियरिंग उत्पादों का सबसे बड़ा बाजार है, वहां जनवरी में निर्यात 6.8 प्रतिशत घटकर 1.51 अरब डॉलर रह गया, जबकि जनवरी 2025 में यह 1.62 अरब डॉलर था।
इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन परिषद इंडिया के अध्यक्ष पंकज चड्ढा ने कहा कि जनवरी में दो अंकों की वृद्धि का एक प्रमुख कारण अनुकूल आधार प्रभाव रहा। उन्होंने बताया कि अधिकांश क्षेत्रों में भारतीय इंजीनियरिंग निर्यात ने फिर से मजबूती दिखाई है। बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच यह सकारात्मक संकेत है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले महीनों में इंजीनियरिंग निर्यात में वृद्धि जारी रहेगी और वित्त वर्ष 2025-26 में यह 120 अरब डॉलर के स्तर को पार कर सकता है।
चड्ढा ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा हाल में घोषित योजनाएं, विशेष रूप से मार्केट एक्सेस योजना, भारतीय निर्यातकों के लिए महत्वपूर्ण सहायक सिद्ध होंगी। इससे अधिक संख्या में भारतीय निर्यातक वैश्विक प्रदर्शनियों में भाग लेकर अपने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रदर्शित कर सकेंगे। इस बीच परिषद ने सरकार से रोड़टेप लाभ को आधा किए जाने के निर्णय पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। परिषद का कहना है कि बाहरी मोर्चे पर जारी चुनौतियों और अनिश्चितताओं को देखते हुए निर्यातकों को प्रोत्साहन की आवश्यकता है।
भारत के इंजीनियरिंग उत्पादों के 25 प्रमुख बाजारों में से 19 देशों में निर्यात में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई, जबकि छह देशों में गिरावट रही। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, सिंगापुर और चीन जैसे प्रमुख बाजारों में उल्लेखनीय बढ़त देखी गई। संयुक्त अरब अमीरात को जनवरी 2026 में इंजीनियरिंग निर्यात 42.4 प्रतिशत बढ़कर 871.48 मिलियन डॉलर हो गया। सऊदी अरब के मामले में यह 33.3 प्रतिशत बढ़कर 518.58 मिलियन डॉलर रहा। क्षेत्रवार आधार पर उत्तर अमेरिका और यूरोपीय संघ जनवरी में भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों के लिए शीर्ष दो निर्यात क्षेत्र बने रहे।

