नई दिल्ली,
Bangladesh में गरीबी एक बार फिर तेज़ी से बढ़ रही है। Asian Lite newspaper की एक रिपोर्ट के अनुसार, post-Hasina राजनीतिक अस्थिरता (political instability) के चलते देश में निवेश और औद्योगिक विकास में भारी गिरावट आई है।
📉 World Bank Data: Growth 4% पर, 30 लाख लोग फिर से गरीबी रेखा के नीचे
रिपोर्ट में World Bank के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि FY25 में Bangladesh की आर्थिक वृद्धि दर सिर्फ 4% रह गई है।
इस धीमी growth के कारण poverty rate (measured at $3 per day, 2021 PPP) बढ़कर 8.9% तक पहुंच सकता है।
इसका मतलब है कि करीब 30 लाख नए लोग गरीबी की मार झेलेंगे।
🧑🏭 Labour Market में गिरावट — Job Losses और Low-Wage Trap
देश के labour market की हालत भी खराब होती जा रही है।
2024 में employment ratio 56.7% तक गिर गया है।
Service sector में भारी job losses हुए हैं, जबकि कृषि क्षेत्र में काम करने वाले युवा और महिलाएँ अब भी low-skill और low-wage traps में फंसे हुए हैं।
Urban क्षेत्रों में young graduates और women employees के लिए अवसर कम हो रहे हैं, जिससे उन्हें low-paying service jobs अपनानी पड़ रही हैं।
💸 Yunus सरकार पर सवाल — IMF Conditions के बावजूद सुधार नहीं
रिपोर्ट में कहा गया है कि Mohammad Yunus की interim government, जो एक साल से अधिक समय से सत्ता में है, macroeconomic stability लाने में असफल रही है।
IMF की शर्तों को पूरा करने के प्रयासों के बावजूद inflation और fiscal imbalance पर काबू नहीं पाया जा सका।
परिणामस्वरूप, देश में poverty और unemployment दोनों में वृद्धि हुई है, और अर्थव्यवस्था एक regressive phase में चली गई है।
📊 PPRC Survey: हर चार में एक व्यक्ति गरीबी रेखा के नीचे
Power and Participation Research Centre (PPRC) के ताज़ा सर्वेक्षण के अनुसार,
Bangladesh की 25% आबादी अब poverty line के नीचे जीवनयापन कर रही है — जो 2022 की तुलना में काफी अधिक है।
Urban households की 55% से अधिक income सिर्फ खाद्य आवश्यकताओं पर खर्च हो रही है, जिससे health, education और savings पर खर्च की गुंजाइश बेहद सीमित रह गई है।
⚠️ “Precarious Edge” — Poverty के और करीब आता समाज
रिपोर्ट चेतावनी देती है कि अब केवल गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले ही नहीं, बल्कि वो लोग भी खतरे में हैं जो एक छोटी सी आय या climate shock से poverty में गिर सकते हैं।
PPRC study में बताया गया कि consumption shortfall gap 2022 से अब तक दोगुना हो चुका है — जो नीति-निर्माताओं के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
🚨 Governance और Human Rights पर भी सवाल
Asian Lite ने लिखा है कि अब एक consensus बन रहा है कि interim government न केवल economic governance, बल्कि law and order और human rights में भी नाकाम रही है।
Minority rights, freedom of dissent और leadership accountability पर भी सवाल उठ रहे हैं।
📌 निष्कर्ष: Bangladesh का विकास मार्ग दोराहे पर
कुल मिलाकर, Bangladesh आज एक critical economic crossroad पर खड़ा है —
जहां political instability, weak reforms, और governance failure ने दशकों की development gains को खतरे में डाल दिया है।

