चारु भाटिया | जयपुर
1935 से जुड़ी विरासत वाली ऑरिक मिल्स धीमी पिसाई, स्वच्छ प्रसंस्करण और नवाचार पर आधारित खाद्य उत्पादों के माध्यम से भारत के पारंपरिक अनाजों को फिर से पहचान दिलाने का प्रयास कर रही है। कंपनी के सह-संस्थापक एवं सीईओ नीरज पेरिवाल का मानना है कि पोषण की शुरुआत आटे जैसी रोजमर्रा की बुनियादी खाद्य सामग्री से होती है और उपभोक्ताओं को अपने भोजन के बारे में पूरी जानकारी मिलनी चाहिए। किसानों से सीधे पारंपरिक अनाजों की खरीद करने से लेकर सत्तू वेंडिंग मशीन और मिलेट आधारित पेय पदार्थ पेश करने तक, ऑरिक मिल्स पारंपरिक खाद्य ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ रही है। इस बातचीत में पेरिवाल ने कंपनी की विरासत, बदलती उपभोक्ता प्राथमिकताओं, किसानों के साथ साझेदारी, उत्पादों में नवाचार और भारत के पारंपरिक खाद्य उद्योग के भविष्य को लेकर अपने विचार साझा किए।
प्रश्न: ऑरिक मिल्स का सफर काफी दिलचस्प रहा है और इसकी जड़ें आजादी से पहले के दौर तक जाती हैं। इसकी यात्रा और विकास के बारे में कुछ बताइए।
उत्तर: ऑरिक मिल्स की शुरुआत 1935 में हुई थी और हमारा सफर लंबे समय से अनाज के व्यापार से जुड़ा रहा है। रियल एस्टेट और कैटरिंग सहित कई अन्य व्यवसायों में भी हमारी भागीदारी रही है। हालांकि, लगभग एक साल पहले हमें महसूस हुआ कि अब खाद्य बाजार की एक महत्वपूर्ण जरूरत को पूरा करने के लिए एक अलग ब्रांड स्थापित करने का समय आ गया है। पारंपरिक आटा चक्कियों में धीरे-धीरे गति और उत्पादन की मात्रा को प्राथमिकता दी जाने लगी है, जबकि पोषण की गुणवत्ता से जुड़े सवाल अक्सर पीछे छूट जाते हैं। औद्योगीकरण ने खेती के तरीकों, मिट्टी की गुणवत्ता और खाद्य प्रसंस्करण को भी प्रभावित किया है। हम ऐसी व्यवस्था बनाना चाहते थे, जिसमें आटा उत्पादन के केंद्र में गुणवत्ता और स्वच्छता हो।
हमारी मशीनें लगभग 45 आरपीएम की गति से चलती हैं, जिससे अनाज की धीमी पिसाई संभव होती है। इससे उत्पादन की मात्रा कम रहती है, लेकिन हमारा मानना है कि इस तरीके से आटे की गुणवत्ता पर अधिक ध्यान दिया जा सकता है। हमारी मिल में गेहूं, रागी, ज्वार और राजगिरा जैसे विभिन्न अनाजों के लिए अलग-अलग स्वच्छ और व्यवस्थित हिस्से हैं। इसके अलावा, बीजों के अंकुरण, सुखाने, पिसाई और पैकेजिंग के लिए भी अलग-अलग क्षेत्र बनाए गए हैं। अनाज की खरीद प्रक्रिया भी हमारे लिए उतनी ही महत्वपूर्ण है। हम उन क्षेत्रों के किसानों से सीधे संपर्क करते हैं, जहां विशेष प्रकार के अनाज उगाए जाते हैं। समय के साथ ये रिश्ते पारिवारिक संबंधों जैसे बन जाते हैं। हम सोना मोटी जैसे पारंपरिक गेहूं की किस्मों की आपूर्ति करते हैं, जो भारत की प्राचीन देशी गेहूं की किस्म है और पंजाब व राजस्थान में उगाई जाती है। इसके अलावा, हम खपली गेहूं भी प्राप्त करते हैं, जिसकी खेती महाराष्ट्र और उत्तरी कर्नाटक में की जाती है। खपली गेहूं में फाइबर और प्रोटीन की अच्छी मात्रा होने के कारण इसे विशेष रूप से महत्व दिया जाता है। अंततः हमारा मानना है कि हर व्यक्ति को अच्छे पोषण का अधिकार है और इसकी शुरुआत रोजाना इस्तेमाल होने वाले आटे जैसी बुनियादी खाद्य सामग्री से होती है।
प्रश्न: खाद्य बाजार की किन खास कमियों ने आपको ऑरिक मिल्स को एक उपभोक्ता ब्रांड के रूप में स्थापित करने के लिए प्रेरित किया?
उत्तर: हमें लगा कि लोगों के भोजन में इस्तेमाल होने वाले अनाजों की गुणवत्ता और उनके पोषण मूल्य को लेकर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। भारत में खाद्य पदार्थों की कमी के दौर और उसके बाद कृषि उत्पादन के विस्तार के दौरान कृषि एवं खाद्य प्रणालियों में बड़े बदलाव हुए। इन बदलावों से खाद्यान्न की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिली, लेकिन फसलों को उगाने और उनके प्रसंस्करण के तरीके भी बदल गए। बड़े पैमाने पर होने वाली पिसाई में दक्षता और अधिक उत्पादन को प्राथमिकता दी जाती है। हम एक ऐसे विकल्प पर काम करना चाहते थे, जिसमें अनाज की गुणवत्ता, उसकी खरीद के स्रोत और पिसाई की प्रक्रिया पर अधिक ध्यान दिया जाए। ऑरिक मिल्स की स्थापना का उद्देश्य स्वच्छ और बेहतर तरीके से प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराने के साथ पारंपरिक अनाजों को लोगों के रोजमर्रा के भोजन में वापस लाना है। हमारे लिए यह केवल आटा बेचने का व्यवसाय नहीं है। हम चाहते हैं कि उपभोक्ता समझें कि वे क्या खा रहे हैं, वह कहां से आया है और उसे किस प्रक्रिया से तैयार किया गया है।
प्रश्न: ऑरिक मिल्स ने हाल ही में भारत की पहली सत्तू वेंडिंग मशीन पेश की है। इस नवाचार के पीछे क्या विचार था?
उत्तर: हमारा एक प्रमुख उद्देश्य भारत के पारंपरिक खाद्य पदार्थों को आधुनिक तकनीक और सुविधा के साथ दोबारा लोकप्रिय बनाना है। सत्तू बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में विशेष रूप से लोकप्रिय है। भुने हुए चने से तैयार होने वाला यह पारंपरिक खाद्य पदार्थ वनस्पति आधारित प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत माना जाता है।
हम चाहते थे कि लोगों को सत्तू पीने के लिए इसे घर पर तैयार करने की जरूरत न पड़े और वे आसानी से इसका सेवन कर सकें। इस विचार पर शोध करने के बाद हमने एक ऐसी डिस्पेंसिंग मशीन विकसित की, जो तीन स्वादों में सत्तू उपलब्ध कराती है—क्लासिक, स्पाइसी और टैंगी। यह मशीन सत्तू के प्रीमिक्स को पानी के साथ मिलाकर कुछ ही सेकंड में ठंडा पेय तैयार करती है। स्वाद के अनुसार इसमें भुना चना, बादाम, जीरा, पुदीना पाउडर और पिंक सॉल्ट जैसी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। लॉन्च के महज 15 दिनों के भीतर हमने अस्पतालों, विश्वविद्यालयों और कॉर्पोरेट कार्यालयों जैसी विभिन्न जगहों पर 100 मशीनें स्थापित कीं। यह प्रणाली एक मिनट में लगभग 45 पेय तैयार कर सकती है, इसलिए अधिक लोगों की आवाजाही वाले स्थानों पर भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। हमारा उद्देश्य पारंपरिक और पौष्टिक पेय को उन लोगों तक आसानी से पहुंचाना है, जो अन्यथा कम पौष्टिक और तुरंत उपलब्ध होने वाले पेय पदार्थ चुन सकते हैं।
प्रश्न: पारंपरिक आटे के अलावा ऑरिक मिल्स के कुछ खास उत्पादों के बारे में बताइए।
उत्तर: हमारे उत्पादों की विविधता इस बात को दर्शाती है कि हम पारंपरिक सामग्रियों को आज की जीवनशैली के अनुकूल बनाना चाहते हैं। सत्तू वेंडिंग मशीन इसका एक उदाहरण है। इसके अलावा, हमारा रागी लाटे भी एक खास उत्पाद है। इसमें रागी के साथ इलायची और गुड़ जैसी सामग्री मिलाकर एक सुविधाजनक पेय तैयार किया जाता है। मिलेट्स वनस्पति आधारित पोषण का महत्वपूर्ण स्रोत हैं। हम इन्हें ऐसे स्वरूपों में पेश करना चाहते हैं, जो आधुनिक उपभोक्ताओं को पसंद आएं। हम बच्चों के पोषण को बेहतर बनाने के उद्देश्य से भी उत्पाद विकसित कर रहे हैं। बच्चों को सब्जियां खिलाना कई बार मुश्किल होता है। लेकिन अगर उपयुक्त सब्जियों और पौष्टिक सामग्रियों को उनके पसंदीदा भोजन, जैसे परांठों के आटे में शामिल किया जाए, तो उन्हें खाना अधिक पसंद आ सकता है। हम ऐसे तरीके तलाशते हैं, जिनसे पौष्टिक सामग्री को रोजमर्रा के भोजन में आसानी से शामिल किया जा सके और सुविधा से भी समझौता न करना पड़े। हमारा व्यापक उद्देश्य यह दिखाना है कि पारंपरिक अनाजों और वनस्पति आधारित सामग्रियों का इस्तेमाल नए और रचनात्मक खाद्य उत्पाद तैयार करने में किया जा सकता है। इन्हें केवल पारंपरिक व्यंजनों तक सीमित रखने की जरूरत नहीं है।
प्रश्न: आप भारत और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ऑरिक मिल्स के उत्पादों की मार्केटिंग किस तरह कर रहे हैं?
उत्तर: डिजिटल प्लेटफॉर्म हमारी वितरण रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं। उपभोक्ता ब्लिंकिट, फ्लिपकार्ट और अमेजन जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से हमारे उत्पाद ऑनलाइन खरीद सकते हैं। उत्पादों की ताजगी हमारे लिए प्राथमिकता है। हम तत्काल ऑर्डर पूरे करने के लिए कुछ स्टॉक रखते हैं, जबकि अन्य उत्पाद ऑर्डर मिलने पर तैयार किए जाते हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी एनसीआर में क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के डार्क स्टोर्स में भी हमारा स्टॉक उपलब्ध रहता है, जिससे ग्राहकों तक उत्पाद सुविधाजनक तरीके से पहुंचाए जा सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बनाने के लिए हम बड़े व्यापारिक प्रदर्शनियों और मेलों में भाग ले रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिली पहचान और अनाज व्यापार से जुड़े स्थापित नेटवर्क के साथ संपर्क ने भी भारत से बाहर अवसर तलाशने में मदद की है। हमें अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय पारंपरिक अनाजों की काफी संभावनाएं दिखाई देती हैं, विशेषकर ऐसे समय में जब उपभोक्ता वैकल्पिक अनाजों और वनस्पति आधारित खाद्य पदार्थों में अधिक रुचि ले रहे हैं। हमारा ध्यान विश्वसनीयता बनाने, गुणवत्ता बनाए रखने और सही वितरण साझेदारियां विकसित करने पर है।
प्रश्न: अगले दस वर्षों में आप ऑरिक मिल्स को कहां देखते हैं?
उत्तर: मैं अगले दस वर्षों में ऑरिक मिल्स को बड़े स्तर पर विकसित होते हुए देखता हूं। हमारी योजना नए उत्पाद पेश करने, प्रसंस्करण की नवीन तकनीकों को तलाशने और ऐसी तकनीकों को अपनाने की है, जो गुणवत्ता से समझौता किए बिना हमारे संचालन को बेहतर बना सकें। हम बीजों, अनाजों और प्रसंस्करण के तरीकों सहित कई क्षेत्रों में शोध कर रहे हैं। पारंपरिक किस्मों के बारे में अधिक जानने और उन्हें आज के उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के नए तरीके विकसित करने की काफी संभावनाएं हैं।
प्रश्न: अंत में, अपना व्यवसाय शुरू करने की इच्छा रखने वाले युवा उद्यमियों को आप क्या सलाह देना चाहेंगे?
उत्तर: मेरा मानना है कि अगर आपके पास एक स्पष्ट विचार है और आप बाजार की वास्तविक जरूरत को पहचान लेते हैं, तो बहुत कुछ संभव है। जुनून महत्वपूर्ण है, लेकिन धैर्य भी उतना ही जरूरी है। व्यवसाय खड़ा करने में समय लगता है और उद्यमियों को सीखने, परिस्थितियों के अनुसार खुद को बदलने तथा चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। बाजार को समझना बेहद जरूरी है। कोई विचार आकर्षक हो सकता है, लेकिन उद्यमियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ग्राहकों को वास्तव में उस उत्पाद की जरूरत है और वे उसके लिए भुगतान करने को तैयार हैं। सही तकनीक के बारे में सीखना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे व्यवसाय की गुणवत्ता, कार्यक्षमता और विस्तार की क्षमता बेहतर हो सकती है।

