अहमदाबाद,
अडानी पावर ने मंगलवार को जानकारी दी कि उसकी सहायक कंपनी मोक्सी पावर जेनरेशन लिमिटेड को तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन लिमिटेड से 558 मेगावाट (शुद्ध) बिजली आपूर्ति के लिए पांच वर्ष की अवधि का लेटर ऑफ अवॉर्ड प्राप्त हुआ है। यह समझौता राज्य के उपभोक्ताओं को अतिरिक्त और भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कंपनी के अनुसार, इस आपूर्ति से तमिलनाडु में बिजली व्यवस्था मजबूत होगी, ग्रिड स्थिरता में सुधार होगा और घरों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों तथा उद्योगों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। मोक्सी पावर जेनरेशन लिमिटेड तमिलनाडु के तूतीकोरिन में 1,200 मेगावाट (2 गुणा 600 मेगावाट) क्षमता वाला बिजली संयंत्र संचालित करती है। कड़ी प्रतिस्पर्धा वाली निविदा प्रक्रिया में कंपनी ने प्रति यूनिट 5 रुपये 91 पैसे का दर प्रस्तावित कर सबसे कम बोलीदाता के रूप में स्थान प्राप्त किया। बिजली आपूर्ति 1 अप्रैल 2026 से प्रारंभ होने की उम्मीद है। अडानी पावर देश की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की विद्युत उत्पादक कंपनी है, जिसकी कुल उत्पादन क्षमता 18.15 गीगावाट है।
कंपनी ने बताया कि अब संयंत्र की दोनों इकाइयों के लिए बिजली आपूर्ति समझौते हो चुके हैं और उसकी कुल परिचालन क्षमता का 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा मध्यम से दीर्घकालिक अनुबंधों के अंतर्गत सुरक्षित है। इससे कंपनी को दीर्घकालिक राजस्व की स्पष्टता मिलेगी और अल्पकालिक बाजार उतार-चढ़ाव से जोखिम कम होगा। आने वाले वर्षों में कंपनी का लक्ष्य अपनी सभी चालू और निर्माणाधीन परियोजनाओं के लिए लगभग 100 प्रतिशत बिजली खरीद समझौते सुनिश्चित करना है। प्रतिस्पर्धी दर पर बिजली सुनिश्चित होने से उपभोक्ताओं को आने वाले वर्षों में सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा मिलने की संभावना है। अडानी पावर की कुल स्थापित तापीय विद्युत क्षमता 18,110 मेगावाट है, जो गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, झारखंड और तमिलनाडु में स्थित 12 संयंत्रों में फैली हुई है। इसके अतिरिक्त गुजरात में 40 मेगावाट का सौर ऊर्जा संयंत्र भी संचालित है।
वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में कंपनी के कर पूर्व लाभ में 5.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। तीसरी तिमाही में कर पूर्व लाभ 2,800 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 2,659 करोड़ रुपये था। यह वृद्धि मुख्य रूप से वित्त लागत में कमी और स्थिर परिचालन प्रदर्शन के कारण संभव हुई।

