Wednesday, July 1, 2026 |
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इस्पात उद्योग 2047 तक भारत को ‘विकसित राष्ट्र’ बनाने के साथ वैश्विक मांग करेगा पूरा : पीयूष गोयल

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बिजनेस रेमेडीज/मुंबई (आईएएनएस)। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का मानना है कि भारत 2047 तक ‘विकसित राष्ट्र’ बनने के लिए तैयार है और इसमें इस्पात उद्योग एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भारत का इस्पात उद्योग न सिर्फ देश, बल्कि विश्व की जरूरतों को भी आने वाले समय में पूरा करने के लिए तैयार है।
उन्होंने एक बयान में कहा कि भारत लगातार आत्मनिर्भरता पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। लेकिन, आत्मनिर्भरता का मतलब दुनिया के लिए दरवाजे बंद करने से नहीं है, बल्कि हम वास्तव में, दुनिया के दूसरे देशों के लिए दरवाजे खोल रहे हैं, क्योंकि हर देश के पास अलग-अलग उत्पादों के लिए अपने प्रतिस्पर्धी लाभ हैं। दरअसल, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल मुंबई में 24 से 26 अप्रैल तक आयोजित हो रहे ‘इंडिया स्टील 2025’ कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, “इस्पात उद्योग में, भारत एक बहुत ही कुशल, लागत प्रभावी और उच्च गुणवत्ता वाला उत्पादक देश है। इसी को देखते हुए हमारा मानना है कि यह एक ऐसा क्षेत्र है, जहां हम न केवल 2047 तक ‘विकसित राष्ट्र’ बनने के साथ-साथ भारत की बढ़ती जरूरतों को पूरा करेंगे, बल्कि इस प्रतिस्पर्धी माहौल में दुनिया की जरूरतों को भी पूरा करने के लिए तैयार हैं।” उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक मांग में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए तत्पर है और भारत का इस्पात उद्योग सभी बाधाओं को पार करते हुए आगे बढऩे के लिए तैयार है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने जोर देकर कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार हमेशा अनुचित व्यापार प्रथाओं के खिलाफ भारतीय उद्योग का समर्थन करने के लिए सतर्क और सक्रिय है। हम ग्राहकों की मांगों और जरूरतों को भी संतुलित करते हैं और इसलिए हम इस्पात उद्योग को तर्कहीन रूप से कम कीमतों पर स्टील की अनफेयर डंपिंग से बचाने में सक्षम हैं, जिसकी जानकारी व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) की अर्ध न्यायिक जांच से मिली।” केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि निर्यातकों और एमएसएमई क्षेत्र को इस्पात अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर मिलता रहेगा। इससे पहले ‘इंडिया स्टील 2025’ के उद्घाटन सत्र को प्रधानमंत्री मोदी ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से संबोधित किया, जिसमें उन्होंने घरेलू इस्पात उत्पादन को बढ़ाने, कार्बन उत्सर्जन को कम करने और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए भारत की रणनीतिक दृष्टि पर जोर दिया।



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