आज महाशिवरात्रि श्रद्धापूर्वक देशभर में मनाई जाएगी, यह हिंदुओं का एक प्रमुख त्योंहार है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, यह त्योंहार आमतौर पर फरवरी या मार्च के महीने में पड़ता है। इस वर्ष महाशिवरात्रि आज मनाई जाएगी। महाशिवरात्रि आध्यात्मिक पथ पर चलने वाले साधकों के लिए बहुत महत्व रखती है। यह उनके लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है, जो पारिवारिक परिस्थितियों में हैं और संसार की महत्वाकांक्षाओं में मग्न हैं। पारिवारिक परिस्थितियों में मग्न लोग महाशिवरात्रि को शिव के विवाह के उत्सव की तरह मनाते हैं। सांसारिक महत्वाकांक्षाओं में मग्न लोग महाशिवरात्रि को शिव के द्वारा अपने शत्रुओं पर विजय पाने के दिवस के रूप में मनाते हैं। साधकों के लिए यह वह दिन है, जिस दिन वे कैलाश पर्वत के साथ एकात्म हो गए थे। वे एक पर्वत की भांति स्थिर व निश्चल हो गए थे। यौगिक परंपरा में शिव को किसी देवता की तरह नहीं पूजा जाता, उन्हें आदि गुरु माना जाता है। पहले गुरु, जिनसे ज्ञान उपजा। ध्यान की अनेक सहस्राब्दियों के बाद एक दिन वे पूर्ण रूप से स्थिर हो गए। वही दिन महाशिवरात्रि का था। उनके भीतर की सारी गतिविधियां शांत हुईं और वे पूरी तरह से स्थिर हुए, इसलिए साधक महाशिवरात्रि को स्थिरता की रात्रि के रूप में मनाते हैं। महाशिवरात्रि के दिन ही शिवजी ने वैराग्य जीवन छोडक़र गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया था। इसी दिन रात में भगवान शिव एवं माता पार्वती का विवाह हुआ था। दूसरी मान्यता के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन ही शिवजी पहली बार प्रकट हुए थे। शिव का प्राकट्य ज्योर्तिलिंग यानी अग्नि के शिवलिंग के रूप में था। महाशिवरात्रि के दिन ही शिवलिंग 64 अलग-अलग जगहों पर प्रकट हुए थे। मान्यता है कि इस दिन माता पार्वती के साथ शिवजी की पूजा करने से सभी परेशानियों से छुटकारा मिलता है। महाशिवरात्रि एक अवसर और संभावना है। जब आप स्वयं को, हर मनुष्य के भीतर बसी असीम रिक्तता के अनुभव से जोड़ सकते हैं, जो कि सारे सृजन का स्त्रोत है। एक ओर शिव संहारक भी हैं और दूसरी ओर वे सबसे अधिक करुणामयी भी हैं। वे बहुत ही उदार दाता भी हैं। यौगिक गाथाओं में वह अनेक स्थानों पर महाकरुणामयी के रूप में सामने आते हैं। उनकी करुणा के रूप विलक्षण और अद्भुत है।

