बिजऩेस रेमेडीज/नई दिल्ली
हमारा ‘आशावाद’ इस आशा और उम्मीद पर टिका हुआ है कि सरकार फिस्कल से जुड़ी समझदारी का इस्तेमाल करना जारी रखेगी। मुद्रास्फीति की स्थितियों और भू-राजनीतिक संघर्षों के कारण बढ़ती वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच, समझदारी भरी फिस्कल नीतियों के साथ अच्छी तरह से संतुलित एक बजट, देश की विकास गति को बनाए रखने और एक मजबूत और टिकाऊ आर्थिक भविष्य सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है।
हम विनिर्माण क्षेत्र (मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर) को मजबूत बनाने और पूँजीगत व्यय को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार की पहलों के आधार पर अहम प्रभावों का अनुमान लगाते हैं, जो भारत के आर्थिक विकास की वक्र रेखा को सकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा। उद्योग के दृष्टिकोण से, हमारी उम्मीदें यह होंगी कि एनबीएफसी के लिए तरलता-संवर्धन (लिक्विडिटी-एंहान्समेंट) के उपायों को बढ़ाने की दिशा में जरूरी और उपयुक्त कदम उठाने के लिए सरकार की ओर से सहायता मिलेगी।
हमें उम्मीद है कि यह बजट फाइनैंशियल सेक्टर में हो रहे बदलावों को आगे बढ़ाने के लिए डिजिटल बुनियादी ढाँचे और अन्य रूप-रेखा उपायों को तेज करने के साथ-साथ कंज्यूमर-फ्रेंडली और आसान बनाई गईं नीतियाँ मुहैया करवाना जारी रखेगा। कुल मिलाकर, हम आशावादी हैं कि यह बजट एक मजबूत, समावेशी और तकनीकी रूप से उन्नत अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देते हुए, विकास और फिस्कल जिम्मेदारी के बीच सही संतुलन बनाएगा।

