सिरोही, अक्टूबर, 2026: परिवार की जिम्मेदारियों के कारण कई लड़कियों की पढ़ाई बीच में छूट जाती है, लेकिन सही समय पर मदद मिले तो वे दोबारा शुरुआत कर सकती हैं। राजस्थान के सिरोही की 20 साल की अनु कुमारी ने भी मुश्किल हालात के बावजूद पढ़ाई फिर शुरू की। ‘Educate Girls संस्था के ‘प्रगति’ कार्यक्रम से जुड़ने के बाद उन्होंने 2025 में राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल से 10वीं की परीक्षा 70 प्रतिशत अंकों के साथ पास की। अब वे 12वीं में पढ़ रही हैं और डॉक्टर बनना चाहती हैं।
नौ सदस्यों वाले परिवार में अनु का बचपन आर्थिक तंगी के बीच बीता। घर में बिजली और शौचालय नहीं था। पानी लेने के लिए हर दिन 15 मिनट पैदल चलकर सरकारी टंकी तक जाना पड़ता था। वर्ष 2019 में माँ के सड़क हादसे में घायल होने के बाद घर की जिम्मेदारियाँ भी अनु पर आ गईं। इसी वजह से 2021 में 10वीं की परीक्षा में असफल होने के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी।
तीन साल बाद ‘प्रगति’ कार्यक्रम की एक सदस्य घर-घर सर्वे के दौरान अनु से मिलीं। उन्होंने उन्हें दोबारा पढ़ाई शुरू करने के लिए प्रेरित किया। 2024 में अनु ने प्रगति कैंप के माध्यम से पढ़ाई शुरू की। घर के काम और पानी भरने की जिम्मेदारी के साथ पढ़ाई करना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। वर्ष 2025 में नगर पालिका के लिए सर्वे करके अनु ने पहली बार 3,500 रुपए कमाए। इन पैसों से उन्होंने घर में बिजली का कनेक्शन लगवाया। बाद में मनरेगा में मेट का काम मिलने पर उनकी मासिक कमाई करीब 6,000 रुपए हो गई। अब वे घर के खर्च और छोटे भाइयों की पढ़ाई में भी मदद करती हैं। अनु दूसरी लड़कियों से भी पढ़ाई दोबारा शुरू करने की अपील करती हैं। उनका कहना है, “शिक्षा से ही हम अपने पैरों पर खड़े हो सकते हैं, खुद कमा सकते हैं और अपने परिवार की मदद कर सकते हैं।”

