Sunday, October 11, 2026 |
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ऑर्गेनिक वेस्ट मैनेजमेंट से आगे बढ़कर ग्रीन एनर्जी और क्लीन-टेक क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत कर रही है Organic Recycling Systems Limited

by Business Remedies
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  • Organic Recycling Systems ने वित्त वर्ष 2026 में मजबूत वृद्धि के साथ दर्ज किया 105 करोड़ रुपए का परिचालन राजस्व
  • कंपनी ने ग्रीन केमिकल्स और BOO मॉडल पर बढ़ाया फोकस

जयपुर। ऑर्गेनिक वेस्ट को ऊर्जा, उर्वरक और अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों में बदलने वाली Organic Recycling Systems Limited की 18वीं AGM हाल में ही आयोजित हुई है। कंपनी की वार्षिक AGM रिपोर्ट से कंपनी की कारोबारी गतिविधियों और भावी योजनाओं के संबंध में जानकारी मिलती है।

कंपनी के प्रमोटर एवं Managing Director सारंग भंड के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में कंपनी के लिए उस विश्वास को बड़े पैमाने के कारोबार में बदलने का वर्ष रहा, जिस पर कंपनी ने करीब 18 वर्ष पहले काम शुरू किया था। कंपनी अब ऑर्गेनिक वेस्ट मैनेजमेंट से आगे बढ़कर Bioenergy, Compressed Biogas (CBG), ग्रीन केमिकल्स और कार्बन कैप्चर आधारित तकनीकों के क्षेत्र में एक इंजीनियरिंग-आधारित क्लीन-टेक प्लेटफॉर्म के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में कारोबार के विस्तार के साथ कंपनी ने अपनी तकनीकी और व्यावसायिक क्षमताओं को मजबूत किया है।

वित्त वर्ष 2026 में राजस्व पहली बार 10,000 लाख के पार: वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का परिचालन से राजस्व 117.14 फीसदी बढ़कर 10,507.50 लाख रुपए हो गया, जो वित्त वर्ष 2025 में 4,839.10 लाख रुपए था। यह पहली बार है जब कंपनी ने किसी वित्त वर्ष में 10,000 लाख रुपए के राजस्व स्तर को पार किया है। कंपनी का EBITDA 46.15 फीसदी बढ़कर 3,088.67 लाख रुपए रहा, जबकि कर पश्चात लाभ 60.56 फीसदी की वृद्धि के साथ 2508.10 लाख रुपए पहुंच गया। कंपनी के प्रबंधन के अनुसार, कर पश्चात शुद्ध लाभ का प्रदर्शन वित्त वर्ष की शुरुआत में दिए गए करीब 2,500 लाख के अनुमान के अनुरूप रहा।

ऑपरेशनल कैश फ्लो में बड़ा सुधार: कंपनी के प्रबंधन ने वित्तीय प्रदर्शन में केवल राजस्व और मुनाफे के बजाय Cash Flow को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। वित्त वर्ष 2026 में परिचालन गतिविधियों से नकदी प्रवाह 1,855.50 लाख रुपए रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 995.50 लाख रुपए का आउटफ्लो था। प्रबंधन के मुताबिक, Cash Flow में यह बदलाव दर्शाता है कि कंपनी की वृद्धि केवल लेखांकन स्तर पर दर्ज नहीं हुई, बल्कि कारोबार से वास्तविक नकदी सृजित हुई है। कंपनी ने Working Capital Management, Contracting और Billing प्रक्रियाओं में अनुशासन बढ़ाने पर भी जोर दिया है।

सीमित कर्ज के साथ विस्तार की रणनीति: तेजी से बढ़ते कारोबार के बावजूद कंपनी ने अपनी Balance Sheet पर कर्ज का दबाव नियंत्रित रखा है। पिछले तीन वर्षों में कंपनी का राजस्व करीब 96 फीसदी CAGR से बढ़ा, जबकि Debt-to-Equity अनुपात 0.4 गुना पर बना रहा। इस दौरान ROCE 7 फीसदी से बढ़कर 16 फीसदी और ROE बढ़कर 20.30 फीसदी हो गया। हालांकि, विस्तार के दौरान Stock-in-Trade और केमिकल्स कारोबार में खरीद बढ़ने के कारण EBITDA Margin 29.40 फीसदी और कर पश्चात शुद्ध लाभ मार्जिन 23.87 फीसदी रहा। प्रबंधन का कहना है कि कंपनी का फोकस केवल मार्जिन बनाए रखने के बजाय नए कारोबारी अवसरों को विकसित करने पर भी है।

ग्रीन केमिकल्स में प्रवेश से कारोबार को नया आयाम: वित्त वर्ष 2026 में कंपनी ने Industrial Associate का अधिग्रहण कर केमिकल्स सेगमेंट में प्रवेश किया है और ग्रीन केमिकल्स की दिशा में आगे बढ़ाने की योजना बनाई है। Management के अनुसार, यह कंपनी के मौजूदा कारोबार से अलग दिशा नहीं है, बल्कि ऑर्गेनिक वेस्ट और कार्बन-आधारित फीडस्टॉक से मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने की मौजूदा तकनीकी क्षमता का अगला विस्तार है। कंपनी का लक्ष्य मौजूदा फीडस्टॉक, Process Technology, रिसर्च क्षमताओं और औद्योगिक ग्राहकों के साथ संबंधों का इस्तेमाल कर ग्रीन केमिकल्स के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करना है।

बायो-CCU तकनीक पर भी काम: कंपनी भारत की शुरुआती बायो-CCU पहलों में से एक पर भी काम कर रही है। यह परियोजना DBT-BIRAC और अंतरराष्ट्रीय ग्रांट फंडिंग के सहयोग से IIT Bombay और IIT खड़गपुर के साथ आगे बढ़ाई जा रही है। कंपनी के अनुसार, बायोगैस में मौजूद CO2 को कैप्चर कर उससे ईंधन और स्पेशलिटी कंपाउंड तैयार करने की दिशा में यह तकनीक काम करेगी। हालांकि, प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि यह वर्टिकल अभी विकास के चरण में है और फिलहाल इससे कोई आय नहीं हो रही है, लेकिन भविष्य की कार्बन इकॉनमी में इसे एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

प्रोजेक्ट आधारित कारोबार से एसेट-बेस्ड मॉडल की ओर बढ़ रही कंपनी: कंपनी की भविष्य की रणनीति में BOO मॉडल को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। अब तक कंपनी मुख्य रूप से दूसरे पक्षों के लिए प्लांट तैयार करती रही है, लेकिन आगे कंपनी विशेष रूप से एग्री-वैल्यूएशन प्रोजेक्ट्स में खुद एसेट विकसित करने, उसका स्वामित्व रखने और संचालन करने की दिशा में बढ़ रही है। इस मॉडल के तहत कंपनी CBG की बिक्री, Fermented Organic Manure तथा भविष्य में कार्बन और अन्य बाय-प्रोडक्ट्स से आय अर्जित करने की योजना बना रही है। प्रबंधन का मानना है कि इससे प्रोजेक्ट आधारित एकमुश्त आय की तुलना में अधिक स्थिर और दीर्घकालिक Annuity Revenue तैयार किया जा सकेगा।

रिसर्च और इनोवेशन को कारोबार से जोड़ने की तैयारी: कंपनी का ‘ORSL Research and Innovation Center’ वित्त वर्ष 2026 में NABL से मान्यता प्राप्त कर चुका है। इसके बाद कंपनी Testing, Validation और Third-Party Research को एक सेवा के रूप में पेश करने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। कंपनी की इन-हाउस गैस-यील्ड बढ़ाने वाली Catalyst Technology को SSS-NIBE से Validation भी प्राप्त हुआ है। कंपनी के पास वर्तमान में दो Granted Patents, पांच से अधिक Commercialized Proprietary Technology और सात से अधिक Innovation Pipeline में हैं। इसके अलावा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के साथ आठ Academic MoU कंपनी की रिसर्च क्षमताओं को मजबूत कर रहे हैं।

100 करोड़ रुपए की ऑर्डर बुक, 200-300 करोड़ रुपए की पाइपलाइन: वित्त वर्ष 2026 के अंत में कंपनी की ऑर्डर बुक करीब 100 करोड़ रुपए रही, जबकि लगभग 200-300 करोड़ रुपए की ऑर्डर पाइपलाइन मौजूद थी। इसके अलावा कंपनी ने 500-600 करोड़ रुपए के BOO प्रोजेक्ट्स की व्यापक संभावित पाइपलाइन की पहचान की है। राजस्थान और मध्य प्रदेश में नए प्रोजेक्ट्स के साथ कंपनी का विस्तार चार राज्यों में पांच प्रोजेक्ट लोकेशन तक पहुंच गया है। कंपनी ने India Energy Week 2026 में Indraprastha Gas Limited के साथ CBG के संयुक्त विकास के लिए MoU तथा SLPP Re-New LLP के साथ मेंबरेन आधारित CBG डेवलपमेंट के लिए सहयोग भी किया है। कंपनी आगे Oil Marketing Companies और City Gas Distribution Network के साथ साझेदारियों को बढ़ाने पर काम कर रही है।

वित्त वर्ष 2027 में करीब 30 फीसदी राजस्व वृद्धि का लक्ष्य: भविष्य की योजना के तहत कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 में करीब 30 फीसदी सालाना राजस्व वृद्धि का मार्गदर्शन दिया है। कंपनी के अनुसार, यह लक्ष्य सुरक्षित क्रियान्वयन पाइपलाइन और विभिन्न कारोबारी वर्टिकल्स में जारी गतिविधियों के आधार पर तय किया गया है। कंपनी का फोकस एक तरफ CBG और कृषि-मूल्यवर्धन कारोबार को विस्तार देने पर है, वहीं दूसरी तरफ ग्रीन केमिकल्स, बायो-CCU और BOO मॉडल जैसे नए क्षेत्रों में दीर्घकालिक कारोबार तैयार करने पर रहेगा।

कंपनी प्रोफाइल: Organic Recycling Systems Limited पिछले करीब 18 वर्षों से ऑर्गेनिक वेस्ट को उपयोगी ऊर्जा और मूल्यवर्धित उत्पादों में बदलने वाली Engineering एवं क्लीन-टेक तकनीकों पर काम कर रही है। कंपनी की तकनीकी क्षमताओं में Advanced Anaerobic Digestion, Bio-Methanation, Compressed Biogas (CBG), Organic Manure, Biochar और अन्य Waste-to-Value समाधान शामिल हैं। कंपनी की रणनीति अब केवल प्लांट बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक, रिसर्च, ग्रीन केमिकल्स और खुद के स्वामित्व वाले BOO एसेट्स के माध्यम से एक दीर्घकालिक क्लीन-टेक प्लेटफॉर्म विकसित करने की है।

कंपनी का विजन: Management का स्पष्ट मानना है कि कंपनी का अगला चरण केवल अधिक प्रोजेक्ट हासिल करने का नहीं, बल्कि ऐसे एसेट और तकनीकी प्लेटफॉर्म तैयार करने का है जो लंबे समय तक स्थिर आय और उच्च मूल्य सृजन कर सकें। सारंग भंड के अनुसार, कंपनी की दीर्घकालिक दिशा “प्लांट-दर-प्लांट, पेटेंट-दर-पेटेंट और मॉलिक्यूल-दर-मॉलिक्यूल” एक अधिक हरित भविष्य तैयार करने की है।

कंपनी को भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड से तीन बड़े EPCOM अनुबंध: Organic Recycling Systems Limited ने बाज़ार में अपनी मजबूत पकड़ का प्रदर्शन करते हुए भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड से तीन बड़े EPCOM अनुबंध हासिल किए हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से कंपनी पहली बार दो नए राज्यों में प्रवेश कर रही है, जिसके तहत कर्नाटक के मैसूर में 5 TPD (85.56 करोड़ रुपए) और छत्तीसगढ़ के रायपुर में 4.8 TPD (81.74 करोड़ रुपए) क्षमता के नगरपालिका ठोस कचरे पर आधारित प्लांट स्थापित किए जाएंगे। कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक इकाई, सोलापुर बायोएनर्जी सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड, 12 महीनों के भीतर मैकेनिकल कार्य और 15 महीनों में पूर्ण Commissioning पूरी कर आगामी 5 वर्षों तक इनका संचालन संभालेगी, वहीं एक ही सप्ताह के भीतर मिले तीसरे BPCL ऑर्डर (92.41 करोड़ रुपए) के बाद कंपनी की कुल संयुक्त प्रसंस्करण क्षमता बढ़कर कम से कम 14.8 TPD हो गई है, जो इसे कुल 15 प्लांट वर्षों का सुनिश्चित परिचालन राजस्व प्रदान करेगी। तीनों परियोजनाओं का कुल मूल्य 259.71 करोड़ रुपए है।

इसके साथ ही कंपनी ने सार्वजनिक क्षेत्र में अपनी साख को और मजबूत करते हुए Indian Oil Corporation Limited के साथ भी अपने गोरखपुर प्लांट के संचालन व रखरखाव अनुबंध का सफलतापूर्वक नवीनीकरण कर लिया है।

नोट: यह लेख निवेश सलाह नहीं है।



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