नई दिल्ली में नई किताब का विमोचन
नई दिल्ली में Climate Change के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों को लेकर Experts ने कहा कि यह केवल पर्यावरण से जुड़ा संकट नहीं है, बल्कि आजीविका, संसाधनों तक पहुंच, प्रतिनिधित्व और शक्ति से जुड़ी गंभीर चुनौती भी बन चुका है। Chintan Research Foundation (CRF) ने अपनी नई edited volume ‘Gendering Climate Futures: Power, Finance, and Justice in a Warming World’ का विमोचन किया।
महिलाओं पर पड़ता है असमान प्रभाव
CRF के President Shishir Priyadarshi ने कहा कि Climate Change का महिलाओं पर असमान प्रभाव पड़ता है। इससे उनकी आजीविका और शिक्षा प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए जमीन का मालिकाना हक बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उन्हें credit और climate-resilient investments तक बेहतर पहुंच मिल सकती है।
Climate Policy में Gender जरूरी
Priyadarshi ने कहा कि Gender को Climate Policy के किनारे रखने के बजाय उसके केंद्र में लाने की जरूरत है, ताकि vulnerability, adaptation और justice से जुड़े मुद्दों को अधिक प्रभावी तरीके से समझा और संबोधित किया जा सके।
South Asia पर विशेष फोकस
Kalyani Shukla और Sandra Kurian द्वारा edited इस volume में Gender और Climate Change के बीच संबंधों का अध्ययन किया गया है। इसमें vulnerability, access, agency, finance और just transition में participation जैसे विषयों पर विशेष रूप से South Asia और India के संदर्भ में चर्चा की गई है।
Land, Finance और Technology तक पहुंच जरूरी
Panel Discussion में Experts ने महिलाओं के लिए land, finance, technology, data और social protection तक पहुंच बढ़ाने की जरूरत बताई। साथ ही Climate और employment policies में Gender को शामिल करने में संस्थागत बाधाओं और अलग-अलग विभागों के बीच coordination की कमी को बड़ी चुनौती बताया।
बेहतर Data से मजबूत होंगी नीतियां
Experts के अनुसार gender-disaggregated data की उपलब्धता बढ़ाना जरूरी है, ताकि Climate Change के आर्थिक और सामाजिक प्रभावों को बेहतर तरीके से समझकर प्रभावी नीतियां बनाई जा सकें। Discussion को Dr Mini Govindan ने moderate किया, जिसमें Arti Ahuja, Dr Nikhil Raj, Pinky Pradhan और Dr Aditi Kapoor सहित कई Experts शामिल हुए।

