मुंबई | बीआर न्यूज नेटवर्क
पश्चिम एशिया में तनाव बढऩे और ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंचने के कारण भारतीय शेयर बाजार लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। इस बीच प्रमुख बेंचमार्कों निफ्टी और सेंसेक्स में 1 प्रतिशत से ज्यादा तक की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार बंद होने के समय 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 813.35 अंकों यानि 1.08 प्रतिशत गिरकर 74,764.23 पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 203.60 अंक यानि 0.86 प्रतिशत गिरकर 23,431.50 पर आ गया।
गिरावट के साथ खुला बाजार
दिन के सत्र में सेंसेक्स अपने पिछले बंद 75,577.58 से 361.36 अंक यानि 0.47 प्रतिशत गिरकर 75,216.22 पर खुला और कारोबारी सत्र में यह 1 प्रतिशत यानि 813.35 अंक लुढक़कर 74,764.23 पर पहुंच गया, जो दिन का सबसे निम्नतम स्तर है। वहीं, निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 23,635.10 से 113 अंक यानि 0.47 प्रतिशत गिरकर 23,522.05 पर खुला और दिन के कारोबार में एक समय यह 203.6 अंक यानि 0.86 प्रतिशत गिरकर 23,431.50 के दिन के निम्नतम स्तर पर पहुंच गया। व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप क्रमश: 0.51 प्रतिशत और 0.48 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए।
निफ्टी आईटी मे सबसे ज्यादा गिरावट
सेक्टरवार देखें तो निफ्टी आईटी में सबसे ज्यादा 3.24 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही निफ्टी रियल्टी और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज का प्रदर्शन भी कमजोर रहा। इनमें क्रमश: 2.23 प्रतिशत और 1.23 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। इसके अलावा, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी मीडिया और निफ्टी फार्मा भी कमजोरी के साथ बंद हुए। जबकि इसके विपरीत, निफ्टी मेटल में 1.79 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली।
इन शेयरों में बढ़त दर्ज की गई
निफ्टी50 इंडेक्स में अदाणी इंटरप्राइजेज, मैक्स हेल्थ, अदाणी पोट्र्स, कोल इंडिया, टाटा स्टील, हिंडाल्को, अपोलो हॉस्पिटल और एनटीपीसी के शेयरों में 5-1 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई और ये दिन के टॉप गेनर्स की लिस्ट में शामिल रहे। वहीं, इंफोसिस, एचडीएफसी लाइफ, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाली कंपनियां रहीं।
बाजार अब मिडिल ईस्ट संकट से तय कर रहा कीमतें
एक मार्केट एक्सपर्ट ने बताया कि बाजार अब मिडिल ईस्ट में लंबे समय तक चलने वाले टकराव को ध्यान में रखकर कीमतें तय कर रहे हैं। उम्मीद है कि लगातार जारी
लड़ाई और जवाबी कार्रवाई की वजह से निकट भविष्य में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी।
विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाना मुश्किल
एक्सपर्ट ने कहा कि लगातार बनी हुई भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण प्रमुख केंद्रीय बैंकों के लिए विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो रहा है, जबकि ऊर्जा की बढ़ती लागत आर्थिक गतिविधियों और कीमतों में स्थिरता, दोनों के लिए जोखिम पैदा कर रही है। एक्सपर्ट के अनुसार, बॉन्ड यील्ड और करेंसी में उतार-चढ़ाव बने रहने के कारण, निवेशकों के सतर्क रुख अपनाने की संभावना है, जिससे जोखिम लेने की उनकी इच्छा सीमित होगी और बाजार का मूड भी दबा हुआ रहेगा।

