लोगों को अधिकारों और जिम्मेदारियों को समझने तथा समाज में सक्रिय भागीदारी करने में सक्षम बनाने के लिए आज अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाएगा। वर्तमान में सभी का साक्षर होना अति आवश्यक है। अगर साक्षर नहीं है तो उसे अपने अधिकारों का भी ज्ञान नहीं हो सकेगा और ना ही समाज में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकेगा। जहां पढऩे-लिखने की क्षमता रोजगार, कौशल विकास और बेहतर आर्थिक अवसरों का आधार बनती है। साक्षर महिलाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवार और आर्थिक निर्णयों में अधिक प्रभावी भागीदारी कर सकती हैं। एक ओर जहां साक्षरता लोगों को सूचना समझने, निर्णय लेने और समाज में अपनी आवाज रखने में सक्षम बनाती है। वर्तमान में साक्षर होने का अर्थ डिजिटल माध्यमों, सूचनाओं और मीडिया को समझदारी तथा आलोचनात्मक दृष्टि से इस्तेमाल करना भी है। एनईएससीओ ने वर्ष, 2026 में साक्षरता को समावेशी समाज, टिकाऊ भविष्य और आजीविका के अवसरों से जोड़ा है। इसके अलावा साक्षरता बेहतर शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, समानता और सामाजिक विकास के कई लक्ष्यों की आधारशिला है।
हम सरल शब्दों में यह भी कह सकते हैं कि अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस याद दिलाता है कि साक्षरता केवल अक्षर पहचानने की क्षमता नहीं, बल्कि ज्ञान प्राप्त करने, सही निर्णय लेने, सम्मानपूर्वक जीवन जीने और समाज व राष्ट्र के विकास में भाग लेने की शक्ति है। इस वर्ष की थीम लोगों, पृथ्वी और समृद्धि के लिए साक्षरता रखी गई है। दिवस का उदय वर्ष, 1965 ईरान के तेहरान में निरक्षरता उन्मूलन के लिए विश्व शिक्षा मंत्रियों का सम्मेलन हुआ। इसमें कार्यात्मक साक्षरता की अवधारणा पर जोर दिया गया और अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने का विचार सामने आया। 26 अक्टूबर, 1966 की 14वीं महासभा ने 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस घोषित किया। इसके बाद पहली बार 8 सितंबर,1967 अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया गया। इस दौरान करीब सत्तर से अधिक देशों ने इसमें भाग लिया।

