नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क
वित्त वर्ष 2030-31 तक 2 ट्रिलियन डॉलर के कुल निर्यात लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत को अपने विनिर्माण और व्यापार पारिस्थितिकी तंत्र में बड़े संरचनात्मक बदलाव करने होंगे। वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव यशवीर सिंह ने कहा कि यह लक्ष्य केवल छोटे सुधारों से हासिल नहीं होगा, बल्कि उत्पादन क्षमता, आपूर्ति शृंखला और निर्यात ढांचे में व्यापक बदलाव जरूरी हैं।
निर्यात को मौजूदा स्तर से दोगुना करना होगा
सीआईआई मैन्युफैक्चरिंग कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए यशवीर सिंह ने कहा कि भारत का कुल निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में बढक़र 863 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जबकि वित्त वर्ष 2014-15 में यह 468 अरब डॉलर था। हालांकि 2030-31 तक 2 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए मौजूदा विकास गति को दोगुने से अधिक करना होगा। उन्होंने कहा कि भारत को निर्यात बढ़ाने के लिए नए बाजारों की पहचान करने और वैश्विक मांग के अनुरूप उत्पादन क्षमता विकसित करने पर भी ध्यान देना होगा।
विनिर्माण क्षमता और आपूर्ति
शृंखला में बदलाव जरूरी
वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि भारत को उत्पादन क्षमता बढ़ाने, वैश्विक स्तर की आपूर्ति शृंखला विकसित करने और निर्यात प्रतिस्पर्धा मजबूत करने के लिए व्यापक सुधार करने होंगे। केवल क्रमिक सुधारों से इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करना संभव नहीं होगा। इसके लिए उद्योगों को आधुनिक तकनीक अपनाने, बेहतर लॉजिस्टिक्स व्यवस्था विकसित करने और उत्पादन लागत को प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में काम करना होगा।
वैश्विक विनिर्माण साझेदार के रूप में पहचान बनानी होगी
यशवीर सिंह ने कहा कि ‘चीन प्लस वन’ रणनीति को केवल चीन पर निर्भरता कम करने के रूप में नहीं देखना चाहिए। भारत को खुद को एक भरोसेमंद, पारदर्शी और मजबूत विनिर्माण साझेदार के रूप में स्थापित करना होगा, जो वैश्विक कंपनियों को स्थिर और सुरक्षित आपूर्ति शृंखला उपलब्ध करा सके। इसके लिए देश को निवेश आकर्षित करने और वैश्विक कंपनियों के साथ दीर्घकालिक साझेदारी बढ़ाने की जरूरत है।
बदलती वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर नजर जरूरी
उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था में बड़े बदलाव हो रहे हैं। व्यापार अब केवल आर्थिक गतिविधि नहीं रह गया है, बल्कि कई देश इसे भू-राजनीतिक रणनीति के रूप में भी इस्तेमाल कर रहे हैं। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की बहुपक्षीय व्यवस्था भी कई चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में भारत को बदलते व्यापार नियमों के अनुसार अपनी नीतियों और रणनीतियों को मजबूत करना होगा।
महत्वपूर्ण खनिज और तकनीक में आत्मनिर्भरता पर जोर
यशवीर सिंह ने कहा कि महत्वपूर्ण खनिजों के निर्यात प्रतिबंध और तकनीक तक सीमित पहुंच जैसी चुनौतियां वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने बताया कि वैश्विक विनिर्माण में चीन की हिस्सेदारी 1990 के करीब 3 प्रतिशत से बढक़र 2024 में लगभग 28 प्रतिशत हो गई है। ऐसे में भारत के लिए महत्वपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं में अपनी भूमिका मजबूत करना जरूरी है। इसके लिए तकनीकी क्षमता, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना आवश्यक होगा।

