Monday, August 10, 2026 |
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वर्ष 2031 तक 63 लाख Unit का हो सकता है Car Market

मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन आरसी भार्गव ने कहा कि आने वाले वर्षों में छोटी गाडिय़ों की बाजार हिस्सेदारी में तेज वृद्धि देखने को मिल सकती है

by Business Remedies
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नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क
भारतीय कार उद्योग का आकार वित्त वर्ष 2030-31 तक बढक़र 61 से 63 लाख यूनिट तक पहुंचने की उम्मीद है। मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन आरसी भार्गव ने कहा कि आने वाले वर्षों में छोटी गाडिय़ों की बाजार हिस्सेदारी में तेज वृद्धि देखने को मिल सकती है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 24.22 लाख गाडिय़ों की बिक्री और 4.47 लाख गाडिय़ों के निर्यात के साथ अपने प्रदर्शन को नई ऊंचाई दी है।
छोटी कारों की मांग में लौटेगी तेजी
आरसी भार्गव के अनुसार, आने वाले पांच वर्षों में भारतीय कार बाजार की वृद्धि को लेकर कंपनी सकारात्मक है। जीएसटी सुधारों से ऑटोमोबाइल उद्योग के साथ अर्थव्यवस्था के कई अन्य क्षेत्रों को भी गति मिली है। कंपनी का मानना है कि छोटी कारों के बाजार में बीते वर्षों की तुलना में अब अधिक तेज वृद्धि देखने को मिल सकती है।
मारुति ने दर्ज की रिकॉर्ड बिक्री और निर्यात
मारुति सुजुकी इंडिया ने वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक की सबसे अधिक 24.22 लाख गाडिय़ों की सालाना बिक्री की। कंपनी ने इसी अवधि में 4.47 लाख गाडिय़ों का रिकॉर्ड निर्यात भी किया। लगातार तीसरे वर्ष 20 लाख गाडिय़ों की बिक्री का आंकड़ा पार करने के बाद कंपनी अब उम्मीद से पहले अगले 10 लाख गाडिय़ों के बिक्री माइलस्टोन तक पहुंचने को लेकर आशावादी है।
उत्पादन क्षमता में 5 लाख यूनिट का इजाफा
मारुति सुजुकी इंडिया के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हिसाशी ताकेउची ने बताया कि कंपनी के उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजनाओं में तेजी आई है। वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान कंपनी ने 5 लाख यूनिट की अतिरिक्त विनिर्माण क्षमता जोड़ी है। इससे बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करने और निर्यात क्षमता को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
एसयूवी पोर्टफोलियो मजबूत करने की तैयारी
बदलती ग्राहक प्राथमिकताओं को देखते हुए मारुति सुजुकी अगले 5 से 6 वर्षों में 7 नई एसयूवी लॉन्च करने की योजना बना रही है। कंपनी छोटी कारों के साथ एसयूवी, विभिन्न पावरट्रेन, निर्यात, तकनीकी विकास और सतत मोबिलिटी पर भी जोर दे रही है। कंपनी के अनुसार, विनिर्माण, निर्यात, रोजगार और कौशल विकास के जरिए ऑटोमोबाइल उद्योग भारत के 2047 तक विकसित देश बनने के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।



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