UCBs की Licensing फिर होगी शुरू
New Delhi: Reserve Bank of India (RBI) ने Urban Co-operative Banks (UCBs) को ‘on tap’ आधार पर नए लाइसेंस देने की प्रक्रिया फिर शुरू करने का फैसला किया है। SBI Research की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम Financial Inclusion को मजबूत कर सकता है, लेकिन नए UCBs की स्थिरता के लिए मजबूत Governance, Professional Management, समय पर Oversight और सुरक्षित Technology Adoption बेहद जरूरी होगा।
2004 से रुकी थी नए लाइसेंस की प्रक्रिया
देश में मार्च 2025 तक करीब 1,457 UCBs मौजूद हैं, जिनके पास कुल बैंक Deposits का लगभग 2 प्रतिशत हिस्सा है। नए UCBs की Licensing वर्ष 2004 से रुकी हुई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि UCBs छोटे व्यापारियों, Self-employed लोगों, Salaried Workers और Informal Sector से जुड़े उन वर्गों को Banking Services उपलब्ध कराते हैं, जिनकी बड़े बैंकों तक पहुंच सीमित रहती है।
Rural Cooperative Banks पर भी RBI का फोकस
RBI ने Rural Cooperative Banks (RCBs) के Credit Monitoring Arrangement की व्यापक समीक्षा के बाद नए Directions जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू की है। Cooperative Sector की कुल Assets में RCBs की हिस्सेदारी मार्च 2020 के 66.9 प्रतिशत से बढ़कर मार्च 2024 में 71.2 प्रतिशत हो गई है।
Loan Portfolio Concentration बनी चुनौती
रिपोर्ट के मुताबिक RCBs का Lending Base सीमित होने के कारण Sector और Geographic स्तर पर Loan Portfolio Concentration की चुनौती बनी हुई है। प्रस्तावित Regulatory Measures का उद्देश्य इस जोखिम को कम करना है।
Loan Pricing में Standardisation की तैयारी
RBI ने सभी Regulated Entities के Advances पर Interest Rates से जुड़े Regulatory Framework को Harmonise और Standardise करने का प्रस्ताव दिया है। वर्तमान में 67.6 प्रतिशत Bank Loans EBLR व्यवस्था के तहत हैं। रिपोर्ट के अनुसार Standardisation से Loan Pricing में Transparency, Monetary Transmission और Consumer Protection को मजबूती मिल सकती है।

